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    पत्ती (पाती) मेला

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    उत्तराखंड लोक पर्वों व मेलों में से प्रमुख नंदा देवी मेले के दौरान ही पौड़ी जिले के बगेली थलीसैण सहित कई गांवों में मनाया जाने वाला एक मेला है पाती मेला जिसे पत्ती मेला भी कहा जाता है।


    परमपराओं के अनुसार गांव के पंचायत भूमि पर ही इस मेले का आयोजन होता है। यह मेला ताकत और साहस का परिचय भी देता है। इस मेले के स्वरूप को कुछ-कुछ महाराष्ट्र में होने वाले दही हांडी पर्व से समझा जा सकता है।


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    इस मेले में चीड़ के एक लंबे पेड़ के सारे तनों को काटकर पेड़ को एक लंबे डंडे में तब्दील किया जाता है, फिर उसमें तेल और सेमल लगाकर उसे चिकनाई दी जाती है। और बाद में डंडे के ऊपरी हिस्सों में अनाज, चूड़े, फल आदि स्थानीय उत्पाद बांधे जाते है। जिसे पत्ती या पाती कहा जाता है। जो भी डंडे में ऊपर चढ़कर इन पातियो को लूटता है वह विजेता घोषित होता है। पर यह डंडे में चढ़ने की यह राह आसान नहीं होती। एक तो डंडे में चिकनाई और उस पर चढ़ रहे प्रतिभागियों पर पानी, या साबुन का पानी फेंककर उनकी राह कठिन बनाई जाती है। इस मेले में लोगों का उत्साह देखते ही बनता है।

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