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    वीरेन डंगवाल

    Viren Dangwal - Hindi Poet

    वीरेन डंगवाल

    जन्म5 अगस्त , 1947
    जन्म स्थानकीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल
    पिताश्री रघुनन्दन प्रसाद डंगवाल
    पत्नीडाॅ. रीता डंगवाल
    संतान2 (प्रफुल्ल और प्रशांत)
    शिक्षाएम. ए., डी. फिल
    व्यवसायकवि, शिक्षक
    मृत्यु28 सितम्बर , 2015

    हिन्दी के प्रसिद्ध कवि वीरेन डंगवाल का जन्म टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर में 5 अगस्त, 1947 को हुआ। इनके पिता प्रदेश सरकार में कमिश्नरी के प्रथम श्रेणी अधिकारी थे। डंगवाल सहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत कवि थे। उन्होने पत्रकारिता भी की। बरेली में अमर उजाला में वे ग्रुप सलाहकार व स्थानीय संपादक भी रहे। उन्होने अपनी शिक्षा मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, कानपुर, बरेली, नैनीताल शहरों से की। 1968 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम. ए. करने के बाद डी. फिल की डिग्रियां प्राप्त की। 1971 से डंगवाल बरेली में हिन्दी के प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाने लगे।


    लेखन की शुरूआत उन्होने कविता लिखने से शुरू की। 22 वर्ष की उम्र में उन्होने पहली रचना लिखी। उनकी कवितायें धीरे-धीरे देश की कई सारी साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में छपने लगी। इनकी कविताओं का पंजाबी, अंग्रेजी, मराठी, उड़िया, मलयालम, बाङ्ला आदि भाषाओं में अनुवाद भी हुआ। उन्होने बड़े बड़े रचनाकारों जैसे पाब्लो नेरूदा, बर्तोल्ट ब्रेख्त, वास्को पोपा, नाजिम हिकमत आदि की रचनाओं के दुर्लभ अनुवाद भी किये। वीरेन डंगवाल के तीन कविता संग्रह - "इसी दुनिया में", "दुष्चक्र में सृष्टा", और "स्याही ताल" प्रकाशित हुये है। उनका पहला कविता संग्रह 43 वर्ष की आयु में आया था। अस्वस्थता के कारण बरेली में 28 सितम्बर 2015 को 68 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।


    पुरस्कार व सम्मान


    ✤ 1992 में रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार
    ✤ 1994 में श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरूस्कार
    ✤ 2002 में शमशेर सम्मान
    ✤ 2004 में साहित्य अकादमी पुरस्कार (दुष्चक्र में सृष्टा के लिए)


    प्रमुख रचनायें


    ✤ इसी दुनिया में
    ✤ दुष्चक्र में सृष्टा
    ✤ स्याही ताल
    ✤ कवि ने कहा

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