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    जनार्दन पाण्डे

    जनार्दन पाण्डे (21 जनवरी, 1920): ग्राम नया संगरौली, पट्टी, तल्ला सालम, पोस्ट जैंती अल्मोड़ा। कर्मान्चल की माटी विद्वानों और मनीषियों को जन्मने वाली कोख है। इसी कोख से विद्वान, टीकाकार, अनुवादक, सम्पादक और प्राचीन भारतीय लिपियों में लिखे संस्कृत ग्रंथो और पांडुलिपियाँ को पढ़ने वाले अकेले विद्वान पण्डित जनार्दन पाण्डेय। 1950 में गवर्नमेन्ट कालेज बनारस से साहित्याचार्य, द्वितीय और 1960 में गोरखपुर वि.वि. से एम.ए. (संस्कृत) द्वितीय की डिग्रियाँ प्राप्त की। 1948 से 1994 तक काशी के कई विद्यालयों और ग्रन्थालयों में अध्यापक, अनुसंधान सहायक ग्रन्थाध्यक्ष और शोध परामर्शक रहे। 1995 से दुर्लभ बौद्ध ग्रन्थ शोध योजना, केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ, वाराणसी के कार्यकारी निदेशक पद पर सेवारत हैं।


    तेलुग, ग्रन्थ, कन्नड़, गुजराती, उड़िया, बंगला, मैथिली, नेवारी (पांचों प्रकार की) गुरुमुखी और शारदा लिपियों में लिखित संस्कृत ग्रन्थों को पढ़ने और देवनागरी में प्रतिलिपि करने वाले आधिकारिक विद्वान हैं पाण्डे जी। अब तक शारदा, नेवारी, उड़िया, ग्रन्थ और बंगला की 50 पुस्तकों की प्रतिलिपि कर चुके हैं। हर प्रकार की पाण्डुलिपि पढ़ने का तकनीकी ज्ञान है आपको। सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि.वि. की ओर से म.प्र. का भ्रमण कर लाख से अधिक हस्तलिखित ग्रन्थों का परीक्षण कर चुके हैं। संस्कृत वाङमय की प्रायः सभी शाखाओं में अध्ययन-अध्यापन, टीका, अनुवाद और सम्पादन का आपको दीर्घ अनुभव प्राप्त है। प्राचीन अप्रकाशित संस्कृत पाण्डुलिपियों को सम्पादित कर प्रकाश में लाने की आपकी विशेष रुचि है। अब तक ऐसे 21 महत्वपूर्ण ग्रन्थों को आप प्रकाशित कर चुके हैं। इनके अतिरिक्त साहित्य के 10, दर्शन के 3, वेदों के 3, धर्मशास्त्र के 2, ज्योतिष का 1 और बौद्ध दर्शन के 5 ग्रन्थों पर आपकी टीका, टिप्पणी एवं अनुवाद प्रकाशित हो चके हैं। दर्लभ बौद्ध ग्रन्थ शोध योजना से प्रकाशित 16 ग्रन्थों में आप सह-सम्पादक रहे हैं। हिन्दी में प्रकाशित होने वाली इस एकमात्र शोध पत्रिका का विदेशों में पर्याप्त आदर हैं। इसमें प्रकाशित "दर्लभ बौद्ध परिचय" नामक लेख माला में आपने 600 से अधिक ग्रन्थों का परिचय दिया है।


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