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    एकता बिष्ट - उत्तराखंड की पहली महिला खिलाड़ी

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    Ektabisth

    एकता बिष्ट

     जन्म:  फ़रवरी 08, 1986
     जन्म स्थान: अल्मोड़ा
     पिता:  श्री कुन्दन सिंह बिष्ट
     माता:  श्रीमती तारा बिष्ट
     व्यवसाय:  क्रिकेटर
     बल्लेबाजी की शैली:  बाएं हाथ से
     गेंदबाजी की शैली  स्लो लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स
     वनडे पदार्पण:  2 जुलाई 2011 बनाम ऑस्ट्रेलिया

    अल्मोड़ा नगर के खजांची मोहल्ले में पिता पूर्व सैनिक श्री कुन्दन सिंह बिष्ट एवं माता श्रीमती तारा बिष्ट के घर 8 फरवरी, 1986 को जन्मी इस बाला ने अपनी लगन, मेहनत और निष्ठा से वह मुकाम हासिल किया है जो विरलों को ही नसीब होता है।


    प्रारंभिक जीवन


    बाल्यकाल में एकता हुक्का क्लब के खेत में अपने साथियों के साथ क्रिकेट खेला करती थी और सब उसके क्रिकेट के प्रति जुनून को देखकर अचम्भित होते थे क्योंकि वह खेल में अपने साथी लड़कों के बीच अकेली होती थी और सब पर भारी पड़ती थी। होनहार बिरवान के होत चीकने पात वाली कहावत एकता पर सटीक बैठती थी। जब वह कुछ बड़ी हुई तो अल्मोड़ा स्टेडियम में जाकर क्रिकेट का अभ्यास करने लगी। वहीं पर कोच लियाकत अली ने उसकी प्रतिभा को परखा और उसे लैफ्ट-आर्म-स्पिन की गेंद करने की प्रैक्टिस करानी शुरू की। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान उसका चयन विश्वविद्यालय की टीम से हो गया और 2002 से 2006 तक उसने उत्तराखण्ड की टीम में खेला। उसके बाद वह उत्तर प्रेदश की टीम से खेलने लगी। परिवार की आर्थिक स्तिथि ठीक ना होने के कारण और अपनी बेटी की लगन को देख श्री कुंदन सिंह बिष्ट जी ने अल्मोड़ा में चाय की दुकान खोली। 2011 में राष्ट्रीय टीम के लिए एकता का चयन होने के बाद परिवार की वित्तीय स्थिति में सुधर हुआ।


    क्रिकेट करियर


    एकता के खेल-जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहे पर उसने उनका डट कर सामना किया और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रही। 2005 में उनका चयन भारतीय जूनयिर टीम के कैम्प के लिए हुआ पर चोट लगने के कारण उनहे वापस लौटना पड़ा। नवम्बर 2009 में उत्तर प्रदेश की ओर से खेलते हुए एकता ने विदर्भ के खिलाफ आठ ओवर में बिना कोई रन दिए तीन विकेट लिए और इसके बाद उनकी प्रतिभा खुल कर सामने आने लगी। विदर्भ के खिलाफ ही एक अन्य मैच में एकता ने 13 रन देकर पांच विकेट हासिल किए। मध्य प्रदेश के खिलाफ भी एकता ने 10 ओवर में नौ रन देकर तीन विकेट लिए थे। एकता पिछले 2010 में वैस्टइंडीज के खिलाफ भी बोर्ड एकादश की ओर से दो मैच खेल चुकी है और सैन्ट्रल जोन समेत कई प्रथम श्रेणी के मैचों में अपने चमत्कारी खेल से चयनकर्ताओं को प्रभावित करने में सफल रही है। इन्हीं उपलब्धियों के आधार पर 2010 में महिला क्रिकेट टी-20 विश्व कप के लिए सम्भावित 30 खिलाड़ियों में एकता का चयन हुआ पर वह अन्तिम 15 में स्थान नहीं पा सकी। पर एकता की लगन, हिम्मत और खेल के प्रति समर्पण भावना ने उन्हें राष्ट्रीय टीम में स्थान देकर उसके सपनों को साकार कर दिया। एकता अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने कोच लियाकत अली और माता-पिता को देती है। इसमें उसके भाई विनीत बिष्ट का योगदान भी कुछ कम नहीं है।


    एकता को 2011 में भारत की महिला क्रिकेट टीम के लिए चुना गया था, और 2 जुलाई 2011 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय मैच खेला | 2017 महिला क्रिकेट विश्व कप के फाइनल तक पहुंचने में एकता बिष्ट का एहम योगदान था हालाँकि फाइनल में टीम नौ रन से इंग्लैंड से हार गई थी। इस विश्वकप में उन्होंने चिर प्रतिद्वंदी के खिलाफ मैच जिताऊ 18 रन देकर 5 विकट झटके थे। 2012 से वह घरेलु क्रिकेट में रेलवे के लिए खेलती है।


    सम्मान


    दिसंबर 2017 में उन्हें आईसीसी महिला ओडीआई टीम ऑफ द ईयर और आईसीसी महिला टी-20 ऑफ द ईयर टीम में नामित किया गया था। वह दोनों ही टीमों में नामित होने वाली एकमात्र महिला क्रिकेटर थी । 2017 में उत्तराखंड सरकार ने उन्हें राज्य खेल रत्न से सम्मानित किया।

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