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    विक्टर मोहन जोशी

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    ‌जन्म तिथि - 1 फरवरी, 1896
    जन्म स्थान - अल्मोड़ा
    उपाधि - देशभक्त
    पिता का नाम - जयदत्त जोशी
    माता का नाम -


    ‌विक्टर मोहन जोशी एक निडर आंदोलनकारी, समाजसेवी, गांधीवादी विचारधारा के अनुयायी, कुशल संपादक रहे। इनका जन्म अल्मोड़ा में हुआ था। इनके पिता जयदत्त जोशी जी भी कई आंदोलनों में हिस्सा ले चुके थे। शायद पिता से प्रेरणा लेकर ही मोहन जोशी जी में देश की आजादी के लिये ललख जली। जयदत्त जोशी जी ने ईसाई धर्म अपना लिया था। जिस कारण इन्होने अपने बेटे का नाम विक्टर जोसफ रखा लेकिन उनकी माँ का लगाव हिन्दू धर्म के प्रति ज्यादा था सो उनके कहने पर मोहन नाम को परिवर्तित नहीं किया गया। और विक्टर मोहन जोशी इनका पूरा नाम हुआ। विक्टर मोहन जोशी महात्मा गाँधी जी से काफी प्रभावित थे, और आजीवन वह गाँधीवादी विचारधारा का अनुपालन करते रहे।


    पढ़ाई :


    ‌मोहन जोशी जी ने 1917 में इलाहाबाद के इरविन क्रिश्चियन काॅलेज से बी0ए0 किया।


    करियर


    ‌1921 में वे अल्मोड़ा लौट के आ गये। 1921 के कुली बेगार प्रथा के खिलाफ हुए आंदोलन में भी जोशी जी का योगदान रहा। बद्रीदत्त पाण्डे जी के जेल जाने के बाद ‘शक्ति अखबार’ का सम्पादन किया। 1923 में भिकियासैंण में आजादी के आंदोलन में इन्हे गिरफ्तार भी किया गया।


    ‌हरगोविन्द पन्त जी और बद्रीदत्त पाण्डे जी इन्हे देशभक्त कहकर संबोधित करते थे। 1925 में अल्मोड़ा जिला बोर्ड का अध्यक्ष भी रहे, बाद में इन्होनें यह पद छोड़ दिया था। जनता को आजादी के जागरूक करने हेतु ’स्वाधीन प्रजा’ नामक साप्ताहिक अखबार भी प्रकाशित किया। अपने इस अखबार में छपी खबरें अंग्रेज सरकार को परेशान करने लगी, जिस कारण उन्होने स्वाधीन प्रजा अखबार पर 6 हजार रूपये की जमानत लगा दी। परन्तु जोशी जी ने अंग्रेजों को जमानत देने के बजाय अखबार को बंद कर दिया। जोशी जी ने स्वराज मंदिर की स्थापना भी की। जिसका शिलान्यास महात्मा गांधी द्वारा कराया, जिस साल वे कौसानी यात्रा पर आये थे। गाँधी जी मोहन जोशी जी के कार्यों से काफी प्रभावित हुये और अपने द्वारा लिखी पुस्तक यंग इण्डिया में ‘ईसाई समाज का उत्कृष्टा पुष्प’ कहकर संबोधित किया।


    ‌1930 में झण्डा सत्याग्राह का नेतृत्व भी किया, यह उस समय अल्मोड़ा की अपने आप में एक बड़ी घटना थी। इसी झण्डा सत्याग्रह के दौरान हुये लाठी चार्ज में इनके सर और रीढ़ की हड्डी में काफी चोटे आई । कहा जाता है कि उनके सर की चोट अन्दरूनी घाव कर गई जिस कारण धीरे धीरे इनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। उन्होने धीरे धीरे लोगों से मिलना जुलना कम कर दिया। आखिरकार 4 अक्टूबर 1940 को 44 वर्ष की आयु में इनका निधन हो गया।
    आजादी में उनके योगदान को देखते हुये अल्मोडा के राजकीय महिला अस्पताल में 12 फरवरी,2004 को उनकी मूर्ति लगाई गई, इसे विक्टर मोहन जोशी महिला चिकित्सालय के नाम से जाना जाता है। बागेश्वर का राजकीय इंटर काॅलेज भी उनके नाम पर रखा गया है- ‘विक्टर मोहन जोशी मेमोरियल राजकीय इंटर काॅलेज’। अल्मोड़ा के एन.टी.डी. (नारायण तेवाड़ी देवाल) क्षेत्र में उनकी समाधि स्थल है।

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