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    त्रिशूल पर्वत

    trisul-peak

    उत्तराखंड की हिमालय श्रेणियों में से एक त्रिशूल पर्वत तीन चोटियों का एक समूह है, यह तीनों पर्वत चोटियां त्रिशूल , जो कि भगवान शिव का अस्त्र है, के हूबहू है। इसलिए इस पर्वत का नाम त्रिशूल पड़ा। आमतौर पर तीनों चोटियों को त्रिशूल पर्वत कहा जाता है। लेकिन थोड़ा विस्तार में जाये तो यह पर्वत तीन चोटियों के नाम पर है- 1. " त्रिशूल 1" , 2. " त्रिशूल 2 ", 3. " त्रिशूल 3" । समुद्र तल से त्रिशूल 1 की ऊंचाई 7,120 मी0 (23,359 फ़ीट) , त्रिशूल 2 की ऊंचाई 6,690 मी0 (21,949 फ़ीट) , त्रिशूल 3 की ऊंचाई 6,007 मी0 (19,708 फ़ीट) है।


    त्रिशूल पर्वत चमोली जिले में और बागेश्वर जिले के निकट स्थित है। वेदनी बुग्याल के आस पास से इस पर्वत का भव्य रूप देखा जा सकता है। त्रिशूल पर्वत पर सर्वप्रथम 1907 में (12 जून, 1907) में प्रथम बार आरोहण हुआ। टी0 जी0 लॉंगस्टाफ़ (T. G.Longstaff) नामक ब्रिटिश पर्वतारोही ने प्रथम बार अपने दो अन्य साथियों व पोर्टरों के साथ त्रिशूल 1 पर आरोहण किया था। कहा जाता है कि पहले पहले स्थानीय पोर्टर त्रिशूल पर चढ़ने के लिए इसलिए नहीं मानते थे क्योंकि त्रिशूल भगवान शिव का अस्त्र है (धार्मिक धारणाओं के तहत त्रिशूल पर्वत पर चढ़ने के लिए नहीं मानते थे) । ये सभी ऋषि गंगा घाटी (नंदा देवी पर्वतमाला के आस पास की घाटी) से होते हुए उत्तरी क्षेत्र में त्रिशूल ग्लेशियर पर पहुंचे थे। वहां से उत्तर पूर्व की ओर त्रिशूल 1 की तरफ चढ़े।


    वहीं त्रिशूल 2 और त्रिशूल 3 को 1960 में प्रथम बार यूगोस्लाविया की जाहो(JAHO) टीम ने आरोहण किया था।


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