KnowledgeBase

    पाणी राखो आंदोलन

    Read This Article in Hindi/ English/ Kumauni/ Garwali

    ‌पौढ़ी गढ़वाल के उफरैंखाल गांव में 1989 में यह आंदोलन की नींव पड़ी। इसके सूत्रधार यहीं के शिक्षक व पर्यावरणविद् सच्च्दिनंद भारती जी थे। इस आंदोलन के तहत बंजर हो चुकी भूमि व जंगल को फिर से हरा करना था। इसमें युवाओं, महिलाओं व बच्चों द्वारा बरसाती पानी को रोकने हेतु छोटे छोटे गड्ढे बनाये गये। व उसके आस पास चौड़ी पत्ती वाले पेड़ रोपे गये। कुछ सालों बाद वहां हरियाली छाने लगी। सूखे गड्ेरे नदी में बदल गये। जंगलों की अंधाधुध कटाई को रोकने हेतु सच्चिदानंद भारती ने ‘दुधतोली लोक विकास संस्थान’ का गठन किया और सरकारी अधिकारियों पर पेड़ो को ना काटने का दबाव भी बनाया। इस आंदोलन के तहत लाखों पेड रोपित किये गये।

    Leave A Comment ?