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    सुन्दरलाल बहुगुणा

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    सुन्दरलाल बहुगुणा

    जन्मजनवरी 9, 1927
    जन्म स्थानमरोड़ा, सिलयारा (टिहरी गढ़वाल)
    माताश्रीमती पूर्णादेवी
    पिताश्री अम्बादत्त बहुगुणा
    पत्नीश्रीमती विमला नौटियाल
    संतानराजीवनयन बहुगुणा, माधुरी पाठक, प्रदीप बहुगुणा
    शिक्षाबी.ए., एम.ए.(अपूर्ण)
    व्यवसायसामाजिक कार्यकर्त्ता, पर्यावरणविद
    सम्मानपद्म विभूषण
    उपनामपर्यावरण गाँधी, वृक्षमित्र
    मृत्युमई 21, 2021

    विकास के नाम पर प्रकृति से होने वाली छेड़छाड़ व उसके पीछे होने वाली दुर्गति को शायद सुन्दरलाल बहुगुणा जी समझ गये थे। जिस कारण उन्होने 'चिपको आन्दोलन' द्वारा पेड़ों को काटने से बचाने की मुहिम शुरू की। और पूरे विश्वभर में पर्यावरण गाँधी व वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध हुये। (Sunderlal Bahuguna is Associated with)


    प्रारंभिक जीवन


    सुन्दरलाल बहुगुणा जी की प्रारम्भिक शिक्षा टिहरी में ही पूरी की। राजनीति विज्ञान, इतिहास और अंग्रेजी विषयों से लाहौर से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की आपने टिहरी रियासत की स्वाधीनता के लिये भी संघर्ष किया। मात्र 17 वर्ष की किशोरावस्था में राजनीति और समाजसेवा में प्रविष्ट हुए। श्रीदेव सुमन, ठक्कर वापा, मीरा बहिन और विनोबा भावे के सम्पर्क में आकर हरिजन सेवा, अस्पृश्यता निवारण, मद्य निषेध, ग्राम जागरण तथा पर्यावरण सन्तुलन को लेकर आन्दोलन चलाए। मीराबेन व ठक्कर बाप्पा के सानिध्य में दलित वर्ग के उत्थान के लिये प्रयासरत भी रहे और दलित वर्ग के विद्यार्थियों के लिये टिहरी में ठक्कर बाप्पा होस्टल की स्थापना भी की।


    समाजसेवी के रूप में


    एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर सुन्दरलाल बहुगुणा जी ने कई महत्वपूर्ण कार्य किये। विश्व विख्यात वन्य जीवन के पक्षधर रिचर्ड सेन्ट बार्ब बेकर से भेंट कर 'वृक्ष मानव' संस्था की स्थापना की। शराब की दुकानों के खोलने के विरोध में सोलह दिनों तक अनशन भी किया। दलितों को मंदिर प्रवेश का अधिकार दिलाने के लिए भी इन्होनें आन्दोलन छेड़ा। अपनी पत्नी श्रीमति विमला नौटियाल के साथ अपने गांव में 'पर्वतीय नवजीवन मण्डल' की स्थापना भी की। टिहरी बाँध के निर्माण के औचित्य के प्रश्न को लेकर आपने कई बार आन्दोलन, भूख हड़तालें कीं, किन्तु स्थानीय स्तर पर जन समर्थन के अभाव में और निर्माण के लिए कटिबद्ध सरकार की सख्ती ने आपको अपने उद्देश्य की प्राप्ति में निष्फल कर दिया। इस सिलसिले में एक बार आपको जेल भी जाना पड़ा था।


    लेखक के रूप में


    सुन्दरलाल बहुगुणा जी जी कुशल लेखक और पत्रकार भी हैं। उत्तराखण्ड में 120 दिन, उत्तराखण्ड प्रदेश और प्रश्न, बागी टिहरी (टिहरी जनक्रान्ति का ऐतिहासिक दस्तावेज), हमारे वन और जीवन प्राण, भू प्रयोग में बुनियादी परिवर्तन की ओर, धरती की पुकार उनकी कुछ कृतियाँ हैं।


    पुरस्कार व सम्मान


    • 1981 में सुन्दरलाल बहुगुणा जी ने पद्मश्री पुरस्कार यह कहकर लेने से मना कर दिया था कि जब तक पेड़ों का कटान होता रहेगा तब तक यह पुरस्कार नहीं लेंगे।
    • 1983 - सिंधवी स्मारक ट्रस्ट द्वारा सम्मानित (चिपको आन्दोलन के लिये)
    • 1985 - जमनालाल बजाज पुरस्कार (रचनात्मक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए)
    • 1987 - राइट लाइवलीहुड पुरस्कार (चिपको आंदोलन के लिये)
    • 1987 - शेर-ए-कश्मीर पुरस्कार (पर्यावरण संरक्षण के लिए)
    • 1987 - सरस्वती सम्मान
    • 1989 - डॉक्टरेट ऑफ सोशल सांइसेज की मानद उपाधि, आई.आई.टी रूड़की द्वारा
    • 1999 - गांधी सेवा सम्मान
    • 2001 - पद्म विभूषण
    • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अन्तर्गत जून 1982 में लन्दन में आयोजित विश्व वन काँग्रेस को सम्बोधित किया। 1985 में विश्व कृषि एवं खाद्य संगठन द्वार मेक्सिको में आयोजित विश्व वन काँग्रेस को सम्बोधित किया। विश्व के कई देशों यथा- जर्मनी, जापान, अमेरिका, मेक्सिको, इंग्लैण्ड, फ्रान्स, हौलैण्ड, स्वीडन, डेनमार्क, स्वीट्जरलैण्ड और आस्ट्रेलिया में जाकर पदयात्राओं और भाषणों से प्रकृति संरक्षण का सन्देश फैलाया।


    मृत्यु


    कोरोना संक्रमण से लड़ते हुए 21 मई 2021 को एम्स ऋषिकेश में उन्होंने अंतिम सांस ली।

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