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    सुन्दरलाल बहुगुणा

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    sundarlalbahuguna

    सुन्दरलाल बहुगुणा

     जन्म:  जनवरी 9, 1927
     जन्म स्थान: मरोड़ा, सिलयारा (टिहरी गढ़वाल)
     पिता:  श्री अम्बादत्त बहुगुणा
     माता:  श्रीमती विमला नौटियाल
     पत्नी  श्रीमती विमला नौटियाल
     शिक्षा  बी.ए., एम.ए.(अपूर्ण)
     व्यवसाय:  सामाजिक कार्यकर्त्ता
     संतान:  राजीवनयन बहुगुणा, माधुरी पाठक, प्रदीप बहुगुणा

    ‌विकास के नाम पर प्रकृति से होने वाली छेड़छाड़ व उसके पीछे होने वाली दुर्गति को शायद वो समझ गये थे। जिस कारण उन्होने ‘चिपको आन्दोलन’ द्वारा पेड़ों को काटने से बचाने की मुहिम शुरू की। और पूरे विश्वभर में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध हुये।


    ‌अपनी प्रारम्भिक शिक्षा के बाद बहुगुणा जी ने कला स्नातक की शिक्षा लाहौर में की। आपने टिहरी रियासत की स्वाधीनता के लिये भी संघर्ष किया। और मीराबेन व ठक्कर बाप्पा के सानिध्य में दलित वर्ग के उत्थान के लिये प्रयासरत भी रहे। और दलित वर्ग के विद्यार्थियों के लिये टिहरी में ठक्कर बाप्पा होस्टल की स्थापना भी की।


    ‌एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर इन्होने कई महत्वपूर्ण कार्य भी किये। कहा जाता है कि शराब की दुकानों के खोलने के विरोध में सोलह दिनों तक अनशन भी किया। दलितों को मंदिर प्रवेश का अधिकार दिलाने के लिए भी इन्होनें आन्दोलन छेड़ा। अपनी पत्नी श्रीमति विमला नौटियाल के साथ अपने गांव में ‘पर्वतीय नवजीवन मण्डल’ की स्थापना भी की।


    पुरुस्कार :


    ‌• 1981 में पद्मश्री पुरूस्कार यह कहकर लेने से मना कर दिया था कि जब तक पेड़ों का कटान होता रहेगा तब तक यह पुरूस्कार नहीं लेंगे।
    • 1985 - जमनालाल बजाज पुरूस्कार
    • 1987- राइट लाइवलीहुड पुरूस्कार ( चिपको आंदोलन के लिये)
    • 1987- शेर - ए - कश्मीर पुरूस्कार
    • 1987 - सरस्वती सम्मान
    • 1989 - डॉक्टरेट ऑफ सोशल सांइसेज की मानद उपाधि, आई. आई. टी रूड़की द्वारा
    • 1999 - गांधी सेवा सम्मान
    • 2001 - पद्म विभूषण

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