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    न्यौली या न्योली

    ‌इस गीत पर नेपाली गीत शैली का प्रभाव है। वय: प्राप्त पर्वतीय बालाएं एकान्त स्थल पाकर अपने प्रिय की स्मृति में न्योली छेड़ती है। न्योली में प्रेम पूर्वक अनुभूतियों की अभिव्यक्ति के साथ जीवन के प्रति दार्शनिक भाव की अभिव्यक्ति भी मिलती है, इसमें कहीं औदात्य, कहीं विषाद, कहीं गहन दार्शनिक तथ्य मुखरित हुए हैं।


    ‌किसी नवीन स्त्री को नवीन रूप में सम्बोधित करते हुए गाये जाते है। ये विरह मूलक गीत हैं। जीवन चिन्तन की प्रधानता होने के कारण इनके लम्बे खिंचाव वाले स्वर बहुत करूण व अत्यन्त मर्मस्पर्शी हुआ करते हैं।


    1. काटना काटना पौर आयो चौमासक वन।
    बगणि पाणि थामि जाछ, नी थामिनी यो मन।।


    अर्थात - काटते काटते चतुर्मास का वन पल्लवित हो गया है। बहते पानी का वेग थम गया है। परन्तु यह चंचल मन थम नहीं सकता।


    2. सांझ पड़ी रात घिरी दी बातो निमाण।
    म्यर चित साली दीये जाँ तेरो तियाण।
    पार भीड़ा कांकड़ मारो शीशे की गोली ले।
    मेरो हियो भरि ऊँछौ तेरी मीठी बोली लै ।

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