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    हुड़क्या बौल

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    Hudkya baul

    ‌हुड़क्या बौल एक कृषि गीत हैं, सामूहिक रूप से खेत में परिश्रम करते हुए लोगों के जीवन सरसता स्फूर्ति तथा उमंग का संचार करने का यह अत्यन्त सुन्दर माध्यम है। हुड़क्के के थाप पर श्रम करते हुए हाथों में अनायास ही यांत्रिक गति आ जाती है। प्रमुख गायक विशेष सज्जा के साथ हुड़क्के के थाप देते हुए गीत की एक पंक्ति गाता है। जिसे गुड़ाई करने वाले सभी लोग दुहराते हैं। आरम्भ में ग्राम देवता (भूमिया) की स्तुति गाई जाती है। सूर्यास्त पर दो तीन छन्दों में मंगल कामना करते हुए प्रधान गायक भूस्वामी को आशीर्वाद देता है।


    1. जीरया जीरया जनरियो गोड़ाई तोपाई।
    या ऋतुयो मास भेटने रया।


    2. गीत के बोल - हुड़क्या बौल।
    दैहो सुफल है जाया देवा हो।
    दे हो गौरी का गणेशा देवा हो ।
    भूमि का भूम्याला देवा हो।
    घाती का घत्याला देवा हो।
    सुफल है, जया देवा हो।


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