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    नन्तराम नेगी

    nantramnegi

    ‌नन्तराम नेगी (जीवनकालः सत्रहवीं शताब्दी का मध्य): गांव मैलेथा, जौनसार भाभर, जिला देहरादून। मुगल सेना को धूल चटाने वाला अप्रतिम वीर, साहसी, देशभक्त और राजभक्त। देहरादून के सुदूर-पश्चिम में स्थित जौनसार- भाभर एक जनजातीय क्षेत्र है। भौतिक दृष्टि से पिछड़ा किन्तु सांस्कृतिक दृष्टि से सम्पन्न, सादा व निश्छल सामाजिक जीवन का धनी, प्राकृतिक सौन्दर्य व पौराणिक परम्पराओं से युक्त यह क्षेत्र वीर—भूमि के रूप में भी प्रसिद्ध है।


    ‌मुगल बादशाह औरंगजेब के अत्याचारों से भारत का मैदानी भाग त्रस्त था। मुगल सेना दिल्ली से हिमाचल प्रदेश पर आक्रमण करने आई। उसने पौंटा साहिब में डेरा डाल दिया। नाहन का राजा उस बड़ी फौज को देखकर घबरा गया। उसने घोषणा करवाई कि इस कठिन परिस्थिति में नाहन राज्य को कौन बचा सकता है? राज–दरबारियों ने राजा को सलाह दी कि मैलेथा गाँव का एक वीर नन्तराम नेगी इस कार्य के लिए आगे आ सकता है।


    ‌नाहन के राजा ने तत्काल अपने सेनापति को मैलेथा भेजा। दुर्गम पर्वतीय मार्ग से होता हुआ वह सेनापति नन्तराम के गाँव पहुँचा। संयोग से नन्तराम घर पर ही था। सेनापति ने राजा का सन्देश उस नवयुवक को दिया। नन्तराम तुरन्त तैयार होकर नाहन की ओर चल दिया। राजा इस सुगठित नौजवान को देखकर प्रसन्न हुआ। उसने नन्तराम की परीक्षा लेने के लिए दरबार में एक भारी-भरकम तलवार मंगाई आर दरबार के बीच रखकर उसे उठाने का आदेश दिया। नन्तराम तलवार की ओर बढ़ा और उसने तुलवार को उठाकर बहुत सरलता से हवा में घुमा दिया। उसके इस सामर्थ्य को देखकर सारा दरबार नन्तराम की जय-जयकार से गूंज उठा। इसके बाद एक सैनिक टुकड़ी की बागडोर नन्तराम की सौंप दी गई। उसको लेकर नन्तराम यमुना के तट पर पहुंचा जहां मुगल सेना पड़ाव डाले हए थी। मुस्लिम सिपहसालार शक्ति के नशे में चूर थे। उन्हें यह कल्पना तक न थी कि कहीं कोई अवरोध भी सकता है। इधर नन्तराम ने पहुंचते ही आक्रमण प्रारम्भ कर दिया। मुगल हक्के-बक्के रह गये । अभी वे संभल भी न पाये थे कि पर्वतीय सैनिकों ने भारी मारकाट मचा दी। स्वयं नन्तराम बहादरी से आगे बढ़ा और मुगल सेनापति के तम्बू में जा घुसा। मुगल शराब के नशे में डूबे थे। वे प्रतिकार के लिए तत्पर हो इसके पहले ही नन्तराम ने मुगल सेनापति का सिर धड़ से अलग कर दिया। सेनापति विहीन माल फौज भाग खड़ी हुई । अनेक सैनिक यमुना के तज बहाव में बह गये। अन्य मुगलों को भी नाहन की फौज ने दचकर जाने नहीं दिया।


    ‌यमुना के दाहिने किनारे पर बसे पौंटा साहिब में नन्तराम की जय के नारे गूंजने लगे। घर-घर विजय के दीपक जलाये गये। इस विजय-यात्रा के बाद नन्तराम वापस अपने गांव आया। उसने इतिहास में वीरता का जो अध्याय जोड़ा उसका गौरवपूर्ण उल्लेख जौनसार बाबर के प्रत्येक घर में आज भी किया जाता है। जौनसारी लोक-साहित्य में इस वीर के शौर्य के गीत प्रचलित हैं।

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