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    त्रिवेंद्र सिंह रावत

    Trivendra Singh Rawat

    त्रिवेंद्र सिंह रावत

    जन्मदिसम्बर 20, 1960
    जन्म स्थानग्राम - खैरासेन, पौड़ी
    पिताश्री प्रताप सिंह रावत
    माताश्रीमती बोद्धा देवी
    पत्नीश्रीमती सुनीता रावत
    बच्चे2 पुत्रियाँ
    व्यवसायराजनीतिज्ञ
    शिक्षामास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म
    राजनीतिक दलबी.जे.पी.


    त्रिवेंद्र सिंह रावत एक वरिष्ठ राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, विधायक और उत्तराखंड राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री है। वह भारतीय जनता पार्टी से संबंध रखते है। वह डोईवाला विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक है। वह राज्य के आठवे मुख्यमंत्री है।


    व्यक्तिगत जीवन


    श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का जन्म 20 दिसंबर 1960 को हुआ था। उनका जन्म स्थान खैरासेन नमक गाँव है जो कि कोटद्वार तहसील, पौड़ी गढ़वाल ज़िले में आता है। उनके पिता नाम का श्री प्रताप सिंह रावत और माता का नाम श्रीमती बोद्धा देवी है। उनके माता-पिता की कुल 9 संतान है। त्रिवेंद्र रावत अपने परिवार के सबसे छोटे सदस्य है। वह अपने माँ-बाप की नौवीं और सबसे छोटी संतान है।


    1983 में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने श्रीनगर के बिड़ला कैंपस, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म की परस्नातक डिग्री हासिल करी। उन्होंने अगले साल 1984 में पत्रकारिता में डिप्लोमा कोर्स भी किया। उन्होंने पढ़ाई के उपरांत शादी कर ली और उनकी पत्नी का नाम श्रीमती सुनीता रावत है। उनकी कुल दो पुत्रियां है। उनकी पत्नी सुनीता रावत पेशे से शिक्षिका है। उनका निवास स्थान डिफेन्स कॉलोनी, देहरादून है।


    राजनैतिक जीवन


    त्रिवेंद्र सिंह रावत का राजनीतिक जीवन वर्ष 1979 में शुरू हुआ जब उन्होंने कॉलेज के दौरान ही दक्षिणपंथ की राजनीति करने की ठान ली थी और इसी के तहत उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के तौर पर काम करना शुरू कर दिया और देखते ही देखते अपनी अगुवाई क्षमता, संगठन कार्यशैली के दम पर उन्होंने साल 1981 से प्रान्त प्रचारक के तौर पर भी काम किया।


    साल 1985 उन्होंने देहरादून (तब उत्तर प्रदेश) में महानगर प्रचारक के तौर पर ज़िम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्हें दलगत राजनीति क्षेत्र में ज़िम्मेदारी देते हुए भारतीय जनता पार्टी में भेजा गया और यहाँ पर उन्होंने शुरूआती दौर में संगठन का काम किया। पत्रकारिता की पृष्टभूमि होने के नाते उन्हें मेरठ शहर की राष्ट्रदेव नामक पत्रिका का एडिटर बनाया गया। साल 1993 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया और इस तरह वह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए पांच साल तक पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक रूप में सक्रिय और मज़बूत करने के बाद उन्हें साल 1997 से 2002 के अंतराल तक उत्तराखंड राज्य भाजपा इकाई का संगठन मंत्री बनाया गया। उन्होंने जनहित याचिका दाल के हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की फीस को 1.5 लाख रुपये से 25 हज़ार रुपये तक कम करवाने में अहम भूमिका निभाई।


    इसके अलावा उन्होंने "अपनो बाजार" नामक एक कृषि मंच की स्थापना करी जिसके तहत किसान जन अपना अनाज सीधे बाजार में बेच सकें। साल 2000 के दौरान उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उन्होंने अग्रणी नेताओं की पंक्ति में अपने अलग भूमिका बनाई थी और पौड़ी गढ़वाल ज़िले में आंदोलन की अगुवाई करने वाले प्रमुख नेता साबित हुए। साल 2002 में हुए उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और डोईवाला विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। साल 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में वह फिर से भारी मतों से विजयी होकर दोबारा विधायक चुने गए। उन्हें चीफ मिनिस्टर बी सी खंडूरी की अगुवाई वाली सरकार के मंत्रिमंडल में मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई।


    साल 2013 में उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में दोबारा लौटना पड़ा और इस पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी थी। उन्हें 2014 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश का सह-प्रभारी बनाया गया और उन्होंने प्रभारी अमित शाह के साथ मिलकर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। उन्हें साल 2014 लोकसभा चुनाव के लिए गठित न्यू वोटर कैंपेन के लिए बनी समिति का सदस्य चुना गया। 2014 लोकसभा चुनाव में उन्होंने झारखण्ड प्रदेश प्रभारी की अतिरिक्त ज़िम्मेदारी भी संभाली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संकल्पित "नमामि गंगे" प्रोजेक्ट के तहत बनी स्थायी समिति के स्थापक सदस्य के तौर पर त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी शामिल किया गया। इस प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय स्तर पर गंगा नदी को साफ़ करने का लक्ष्य रखा गया है।


    राज्य के आठवें सीएम


    साल 2017 में हुए उत्तराखंड राज्य विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर डोईवाला सीट से विधायक का चुनाव लड़ा और पार्टी ने दो-तिहाई सीटों के बहुमत के साथ चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करी और सरकार बनाई। भाजपा ने 70 में से 57 सीटें हासिल करी और त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्य संगठन रणनीतिकार के तौर पर जीत का श्रेय दिया गया। गहरे मंथन के भाजपा विधायक दल की बैठक में पार्टी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को विधान दल का नेता सर्वसम्मती से चुना और 17 मार्च 2017 को उन्होंने पहली बार सीएम पद की शपथ ली और उत्तराखंड राज्य के आठवें सीएम बने।


    जुलाई 2019 में उन्होंने पहाड़ी मान्यताओं के आधार पर गाय को एकमात्र ऐसा जानवर बताया था जो कि ऑक्सीजन को बाहर करता है जिसको लेकर उनकी आलोचना की गई थी और उनके बयान अवैज्ञानिक बताया था। हालाँकि उनका बयान आंशिक रूप से तार्किक और सही था क्योंकि गाय एक हिस्से के रूप में ऑक्सीजन अपने शरीर से छोड़ती है जिसको त्रिवेंद्र सिंह रावत स्वयं भी सही बताया था।


    साल 2019 में उनकी अगुवाई में उत्तराखंड सरकार ने खेल महाकुम्भ 2019 का भव्य और सफल आयोजन करवाया था। उन्होंने वर्ष 2021 में होने वाले महाकुम्भ मेला के लिए एक ऐतिसाहिक आयोजन की आधारशीला रखी है और प्रदेश की इतिहास में सबसे भव्य महाकुम्भ धार्मिक मेला होगा। इसके तहत उनके मार्गदर्शन में नए कुम्भ क्षेत्र का विकास हो रहा है।


    त्रिवेंद्र सिंह रावत एक संवेदनशील, मृदुभाषी और अनुशासित व्यक्ति है जो कि आरएसएस की शिक्षा-दीक्षा के तहत अपने जीवन का यापन करते है। उन्हें सदन में अपने ओजस्वी वक्तव्यों और सामायिक कार्यकुशलता के लिए जाना जाता है।


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