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    सुरजीत सिंह बरनाला - उत्तराखंड के पहले राज्यपाल

    Surjit Singh Barnala

    सुरजीत सिंह बरनाला

    जन्म21 अक्टूबर , 1925
    जन्म स्थानअटेली, हरियाणा
    पिताश्री नर सिंह
    पत्नीश्रीमती सुरजीत कौर बरनाला
    संतान4
    शिक्षाबी.ए., एल.एल.बी.
    व्यवसायराजनीतिक, वकील, समाज सेवक, लेखक
    राजनीतिक पार्टीशिरोमणि अकाली दल
    मृत्यु14 जनवरी, 2017

    श्री सरदार सुरजीत सिंह बरनाला का जन्म अटेली, बेगपुर में (अब हरियाणा) के जिला मोहिंदरगढ़ में 21 अक्टूबर 1925 को हुआ था। उनके पिता एक मजिस्ट्रेट थे।


    शिक्षा


    नौ वर्ष की अल्प आयु में उनके पिता का निधन हो गया था। श्री सुरजीत सिंह बरनाला को शिक्षा प्राप्त करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। मैट्रिक के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ चले गए। लखनऊ में अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और जेल भी गए। बरनाला ने 1946 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। (Surjit Singh Barnala First Governor of Uttarakhand)


    राजनीतिक जीवन


    उन्होंने जिला न्यायालय, जिला बरनाला, पंजाब से कानून का अभ्यास शरू किया और साथ ही उनका राजनीतिक झुकाव भी बना रहा। 1952 में पहली बार धनौला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और केवल तीन वोटों से हार गए। श्री बरनाला जी 1969 में बरनाला विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और न्याय गुरनाम सिंह सरकार में पंजाब के शिक्षा मंत्री के रूप में शपथ ली। शिक्षा मंत्री के पद में रहते हुए अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


    वह पंजाब विधानसभा के पांच बार सदस्य रहे - 1967, 1969, 1972, 1980 और 1985 - और 1977 और 1998 में दो बार लोकसभा के सदस्य रहे।


    श्री बरनाला जी ने प्रथम बार लोकसभा का चुनाव 1977 में लड़ा और मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार में कृषि मंत्री, सिंचाई, जल संसाधन, वन मंत्री के रूप में कार्य किया। 1978 में, बरनाला ने बांग्लादेश के साथ ऐतिहासिक गंगा जल समझौते (फरक्का समझौता) पर हस्ताक्षर किए।


    1998 में फिर से अटल बिहारी वाजपेयी कैबिनेट में रासायनिक, उर्वरक, खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री बने।


    संत लोंगोवाल की हत्या के बाद बरनाला को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। उसके नेतृत्व में अकाली दल को विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल हुई और वह 1985 में पंजाब के मुख्यमंत्री बन गए। उन दिनों शिख मिलिटेंट मूवमेंट अपने चरम पर होने के बावजूद भी उन्होंने राज्य के मामलों को बहुत अच्छी तरह से प्रबंधित किया। बरनाला 1985 से 1987 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे और उसके बाद पंजाब में 2 साल राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।


    सुरजीत सिंह 1997 में उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी थे। हालांकि वह कृष्ण कांत से चुनाव हार गए थे।


    राज्यपाल का पद


    सुरजीत सिंह बरनाला ने कई राज्यों के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। पहली बार वे 1990 से 1991 तक लगभग नौ महीने तमिलनाडु के राज्यपाल रहे। 1991 की तात्कालिक डि.एम.के. सरकार को गिराने के प्रस्ताव को स्वीकार न करने के कारण उन्हें बिहार स्थानांतरित कर दिया गया, तो उन्होंने राज्यपाल के पद से इस्तीफा देने का फैसला किया।


    बरनाला 9 नवम्बर 2000 को निर्मित उत्तराखंड राज्य के पहले राज्यपाल बने। बरनाला आंध्रप्रदेश, ओडिशा और पोदीचेरी के राज्यपाल भी रहें।


    व्यक्तिगत जीवन


    सुरजीत सिंह बरनाला का विवाह सुरजीत कौर बरनाला से हुआ जिनसे उन्हें 3 लड़के और 1 लड़की है। बरनाला एक सफल राजनेता के साथ लेखक और चित्रकार भी थे। उनकी दो बुक "स्टोरी ऑफ एन एस्केप" 1996 में प्रकाशित हुई और "माइ अदर टु डॉटर" 2007 में प्रकाशित हुई। उनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी 1998 में पटियाला विश्वविद्यालय की कला गैलरी और 2004 में हैदराबाद स्टेट आर्ट गैलरी में आयोजित की गई थी।


    मृत्यु


    बरनाला का लंबी बीमारी के बाद पी.जी.आई.एम.ई.आर अस्पताल, चंडीगढ़ में 14 जनवरी 2017 को 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

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