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    भट्ट का जौला

    भट्ट का जौला (राजड़)

    सामग्री: 100 ग्राम भट्ट
    हींग: 5 ग्राम
    लौंग: 5 ग्राम
    जीरा: 25 ग्राम
    लालमिर्च: 3 ग्राम
    चावल: 100 ग्राम
    नमक स्वादानुसार


    विधि 1


    भट्ट को भिगाने डाल दिया। चावल बीन कर रख दिये। या सिलबट्टे में बारीक-बारीक पीस लिया। अब चावलों को धोकर कढ़ाई में पानी डालकर पकाने रख दिया। जब चावल पक जायें तो भट्ट की पीठी को घोलकर कढ़ाई में डाल दिया व करछी से चलाते रहे। अच्छी तरह से पक जाने पर गैस बन्द कर दी।


    विधि 2


    भट्ट को बिना भिगोये छिलके निकालते हुए पीसते हैं। उसके बाद चावल धोते हैं और पिसे हुए भट्ट के साथ मिलाकर कड़ाही में उबलते पानी में डालते हैं। थोड़ा पकने पर मडुवे का आटा मिलाकर फिर और अधिक पकने देते हैं। पक जाने पर इसे जीरे के नमक से खाते हैं।


    नमक मसाला


    जौले में नमक नहीं डाला जाता है। नमक बनाने के लिए तवा आँच पर रखा। उसमें थोड़ा सा तेल डाल दिया व बारी-बारी से हींग, जीरे, लौंग तथा लालमिर्च को भून लिया भून जाने पर उन्हें सिलबट्टे में रख कर बारीक-बारीक पीस लिया। व स्वादानुसार नमक मिलाकर एक कर लिया।


    गरम-गरम जौले को थाली में परोस कर व अलग से नमक मिलाकर खाने से निराला स्वाद आता है।


    कब-कब खाया जाता है


    हर मौसम में खाया जाता है। स्वादः स्वादिष्ट व पौष्टिक होता है।


    औषधीय गुण


    क्योंकि यह हल्का और सुपाच्य होता है। अतः पीलिया में अधिक खिलाया जाता है। किंतु पीलिया में मडुवे का आटा नहीं डालते हैं। यह भी प्रचलित धारणा है कि इसे गर्भवती महिला को प्रसव के बाद दिया जाता है इससे दूध की मात्रा की मात्रा बढ़ती है। भट्ट के छिलकों से माँ के पेट में ऐंठन होती है। इसलिए छिलके निकाल देते हैं। गाय-भैंस को ब्याने के बाद इसे खिलाते हैं तो इससे दूध की मात्रा बढ़ती है। भिगोये भट्ट के जौले की तासीर ठंडी व सूखे भट्ट के जौले की तासीर गरम होती है।

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