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    प्रो. शेर सिंह बिष्ट

    प्रो. शेर सिंह बिष्ट जी का जन्म 10 मार्च 1953 को ग्राम, पो. भनोली, जिला अल्मोड़ा में हुआ था। आपने कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से पी.एच.डी. और डी.लिट् की उपाधियां प्राप्त कीं। आपके कुमाउंनी तथा हिन्दी में शैक्षिक एवं साहित्यिक विषयक दो दर्जन से अधिक ग्रन्थ प्रकाशित हो चुके हैं।


    आपके उल्लेखनीय कार्यों के लिए आपको विभिन्न संस्थाओं तथा अकादमियों द्वारा प्रदत्त "आचार्य नरेन्द्र देव पारितोषिक", "आचार्य नरेन्द्र देव अलंकार", "यू.जी.सी. कैरियर अवार्ड", "सुमित्रा नन्दन पंत नामित पुरस्कार", "उत्तराचंल रत्न अवार्ड", आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, "राष्ट्रीय साहित्य सम्मान", "भारत ज्योति अवार्ड", "विवेक गोयल साहित्य पुरस्कार", "महाकवि हरिशंकर आदेश साहित्य ।' भारत ज्योति अवार्ड'', ''विवेक गोयल साहित्य पुरस्कार'', ''महाकवि हरिशंकर आदेश साहित्य-चडामणि सम्मान'', ‘‘मोहन उप्रेती शोध समिति सम्मान'', 'देवसुधा रत्न अलंकरण'' सम्मानों से आप विभूषित हो चुके हैं। इस श्रृंखला में आपको इस वर्ष प्रदेश शासन ने ''डॉ. गोविन्द चातक सम्मान'' से सम्मानित किया है


    सम्पादन के क्षेत्र में भी आपका उल्लेखनीय योगदान रहा है। आपने ‘‘शेरदा अनपढ़ संचयन'', ‘कुमाउँनी का परिनिष्ठित साहित्य'', ''आधुनिक हिन्दी काव्य संकलन'' एवं ''सूर्योदय से पहले'' हिन्दी कविता संग्रह के सम्पादन के अतिरिक्त सह-सम्पादन के रूप में अद्यतन हिन्दी कविता''। ‘‘भाषा-सम्प्रेक्षण: विविध आयाम'', “मानक हिन्दी शब्दावली'', ''जनपदीय भाषा-साहित्य'' तथा ‘कथा-विविधा'' में अपना विद्वतीय योगदान दिया है। आपकी अब तक 29 पुस्तके, 8 पुस्तक समीक्षा, 150 से अधिक लेख व शोध-पत्र, 27 पुस्तकों की भूमिका एवं एक सौ से अधिक कुमाउँनी एवं हिन्दी कविताओं का प्रकाशन हो चुका है। आकाशवाणी से भी आपकी भेटवार्ता, परिचर्चा, काव्य-पाठ, कहानी आदि का प्रसारण होता रहा है।


    इसके अतिरिक्त आपके 16 पी.एच.डी. तथा एक डी. लिट मूल्यांकित शोध-प्रबंध भी हैं। आपके निर्देशन में 13 शोधार्थी पी.एच.डी. प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में आप कुमाऊँ विश्वविद्यालय के एस.एस.जे. परिसर, अल्मोड़ा में हिन्दी विभाग के प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।


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