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    मडुवे की बाड़ी (मडुवक बाड़ी)

    Madauvekebaadee

    मडुवे की बाड़ी (मडुवक बाड़ी)

    सामग्री (पाँच व्यक्तियों के लिए)

     मडुवे का आटा:  150 ग्राम
     अजवाइन:  आधा छोटा चम्मच
     घी या तेल:  150 ग्राम
     स्वादानुसार गुड़ या चीनी
     लोहे की कड़ाही


    विधि


    कड़ाही में घी डालकर अजवाइन और मडुवे के आटे को खूब भूनते हैं। फिर उसमें गुड़ डालकर उसे चलाते हुए उबला पानी मिलाते हैं जिससे तले में न लगे या आटे के डले ना बन जाएं। फिर इस मिश्रण को अच्छी तरह उबालते हैं और भदभद की आवाज आने पर कड़ाही को उतार लेते हैं। ठंडी होने पर पतली-पतली पीने को परोसते हैं।


    विशेष


    अधिकतर गुड़ का ही प्रयोग किया जाता है। चीनी मिलाने से इसकी तासीर ठंडी हो जाती है।


    कब-कब खाया जाता है


    जाड़ों के मौसम में अधिक खायी जाती है।


    स्वाद


    स्वाद में मीठी व स्वादिष्ट होती है।


    औषधीय गुण


    यह गरम होती है अतः अस्थमा व सर्दी से बचने के लिए खायी जाती है। इसे प्रसूता महिलाओं को भी देते हैं। जब गुम चोट लगने पर खून जमा हो जाता है तब बाड़ी खिलाते हैं। इसके सेवन से खून फट जाता है। पेट के लिए भी लाभकारी है। बाड़ी का एक अतिरिक्त लाभ यह है कि कुछ लोग सब्जी न होने पर इसे रोटी के साथ भी खाते हैं।

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