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    खुबानी

    apricot kumbani

    खुबानी

     वैज्ञानिक नाम:   प्रूनस आर्मेनिया
     जगत:  पादप
     कुल:  Rosaceae
     कैलोरी:  34
     कार्ब्स:  8 ग्राम
     प्रोटीन:  1 ग्राम
     वसा:  0.27 ग्राम
     फाइबर:  1.5 ग्राम
     वसा:  0.27 ग्राम
     विटामिन ए:  दैनिक मूल्य का 8%
     विटामिन सी:  दैनिक मूल्य का 8%
     विटामिन ई:  दैनिक मूल्य का 4%
     पोटेशियम:  दैनिक मूल्य का 4%


    खुबानी का मूल स्थान पश्चिमी चीन माना जाता है। हमारे देश में व्यावसायिक बागवानी मुख्यतः हिमालय की पहाड़ियों में खुबानी की कुछ अच्छी किस्में पैदा की जाती हैं। 700 मीटर से 2000 मीटर तक की ऊॅंचाईयों वाले हिमालय के पर्वतीय भाग इसके अच्छे उत्पादक क्षेत्र हैं। खुबानी का फल खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है। इसमें फलों को सुखाकर उस समय प्रयोग किया जा सकता है जब इन फलों का मौसम न हो। खुबानी को नेक्टनर, शराब तथा जैम बनाने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी गुठलियों की गिरी से तेल निकालकर खाने के काम में लाया जाता है। इससे निकली हुई खली को जानवरों को खिलाया जाता है।


    खुबानी का पेड़ 5 वर्ष की आयु से फल देना आरम्भ करता है और 35 वर्ष की आयु तक देता रहता है। पेड़ों में अत्याधिक फूल आने के कारण फलों की संख्या भी अधिक होती है। खुबानी के प्रति पेड़ से लगभग 30-40 किलोग्राम फल प्रति वर्ष प्राप्त हो जाते हैं।


    जब फल परिपक्व अवस्था में पहुॅंच जाएँ तब उन्हें तुरन्त तोड़कर लकड़ी के संदूकों या पेटियों में भरकर बाजार में बेचने के लिए भेज देना चाहिए। यह आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उत्तरांचल से अन्य राज्यों में भी यह फल भेजा जाता है जो आय प्राप्ति का अच्छा साधन है।


    मृदा एवं जलवायु


    साधारणतः खुबानी की बागवानी कई प्रकार की मृदा में की जा सकती है। लेकिन मटियार भूमि में यह सफलता पूर्वक नहीं पैदा की जा सकती। बलुई दोमट मृदा इसके लिए सबसे अच्छी होती है। इसके लिए पानी का निकास अच्छा होना चाहिए।


    खुबानी की बागवानी के लिए हल्की गर्मी वाली जलवायु अत्याधिक उपयुक्त होती है। इसी कारण हिमालय के उत्तरी पश्चिमी भागों में 900 मीटर से 2000 मीटर तक की ऊॅंचाई पर इसके अच्छे किस्म के फल पैदा किये जा सकते हैें। इसके लिए जहाॅं गर्मी में औसतन 16.6 डिग्री से.ग्रे. से 32.2 डिग्री से.ग्रे. तक तापमान हो, इसके फलों की बढोत्तरी के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।


    खुबानी के लाभ


    1. कब्ज संबंधी समस्या दूर होती है।
    2. कोलेस्ट्राॅल नियंत्रित रहता है।
    3. इम्यून सिस्टम मजबूत करता है।
    4. मोतियाबिंद वाले रोगियों के लिए उत्तम फल है।
    5. कील, मुंहासे, त्वचा रोगों के लिए लाभकारी।
    6. कैंसर रोग में फायदेमंद खुबानी।
    7. खुबानी में एंटीऑक्सिडेंट होता हैं जो शारीर को तनाव और पुरानी बिमारियों से बचाता है।


    खुबानी की विभिन्न प्रकार की प्रजातियाॅं - प्रमुख किस्म


    1. शीघ्र पकने वाली - शिलपेज अर्लो, न्यूलार्ज अर्लो, चैबटिया मधु, चैबटिया अलंकार।
    2. मध्य से पकने वाली - कैशा, मोरपार्क, टर्की, चारमग्ज।
    3. देर से पकने वाली - रायल, सेन्ट एम्ब्रियोज, चैबटिया केसरी।
    4. सुखाकर प्रयोग होने वाली - चारमग्ज, पैरापैरोला।
    5. मीठी गिरी वाली - आस्ट्रेलियन, सफेदा, शकरपारा, चारमग्ज।

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