Folk Songs

    बुरांश- सुमित्रानंदन पन्त

    Read This Article in Hindi/ English/ Kumauni/ Garwali

    सुमित्रानंदन पन्त जी की अपनी दुदबोली कुमाऊंनी में एक मात्र कविता है।



    सार जंगल में त्वि ज क्वे न्हां रे क्वे न्हां,
    फुलन छै के बुरूंश ! जंगल जस जलि जां।

    सल्ल छ, दयार छ, पई अयांर छ,
    सबनाक फाडन में पुडनक भार छ,
    पै त्वि में दिलैकि आग, त्वि में छ ज्वानिक फाग,
    रगन में नयी ल्वै छ प्यारक खुमार छ।

    सारि दुनि में मेरी सू ज, लै क्वे न्हां,
    मेरि सू कैं रे त्योर फूल जै अत्ती माँ।

    काफल कुसुम्यारु छ, आरु छ, आँखोड़ छ,
    हिसालु, किलमोड़ त पिहल सुनुक तोड़ छ,
    पै त्वि में जीवन छ, मस्ती छ, पागलपन छ,
    फूलि बुंरुश! त्योर जंगल में को जोड़ छ?

    सार जंगल में त्वि ज क्वे न्हां रे क्वे न्हां,
    मेरि सू कैं रे त्योर फुलनक म' सुंहा॥

    Related Article

    Leave A Comment ?

    Popular Articles

    घुघुती बासुती - Ghughuti Basuti

    हमरो कुमाऊँ - Humro Kumaon

    बेडू पाको बारमासा - Bedu Pako Baramasa

    926

    भूली निजान आपुण देश - Bhooli Nijan Apun Desh

    903

    अटकन बटकन दही - Atkan Batkan Dahi

    887

    उड़ कूची मुड़ कुचि - Ud Koochi Mudh Kuchi

    856

    भली तेरी जन्म भूमि - Bhali Teri Janmbhoomi

    675

    Aa Ha Re Sabha

    633

    Keisha Ho School Humara

    619

    Yatra

    603

    Also Know

    Ek aur gauraa

    80

    Dvi Dinak Dyar

    599

    Deharaadoon Vaalaa Hoon

    518

    Yah rng chunaavee rng thairaa

    186

    Keisha Ho School Humara

    619

    Paaravatee Ko Maitudaa Desh

    168

    Jamunaa Taṭ Raam Khelen

    242

    Yaad Hai Wo Nandhi Gauraiya

    58

    Rritu Geet - Chaitr

    175

    Dagadoo ni Raiaoo Sadaani Dagadyaa

    476