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    त्रेपन सिंह नेगी

    Trapan singh negi

    त्रेपन सिंह नेगी

    जन्म स्थानग्राम- दल्ला, टिहरी
    शिक्षाएल.एल.बी
    व्यवसायराजनेता
    मृत्यु-

    त्रेपन सिंह नेगी (1921-1996) दल्ला गाँव, भिलंगना क्षेत्र, टिहरी गढवाल। टिहरी जनक्रान्ति के प्रथम पंक्ति के नेता, स्वाधीनता संग्राम सेनानी, पृथक उत्तराखण्ड राज्य के प्रबल समर्थक, ईमानदार राजनेता, पूर्व विधायक और सांसद। नेगी जी जब हाईस्कूल में पढ़ रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि श्रीदेव सुमन और श्यामचन्द नेगी टिहरी राजशाही के अत्याचारों के विरोध में आन्दोलन चला रहे हैं, तो वे बीच में ही पढ़ाई छोड़कर क्रान्तिकारियों में मिल गए। बाद में उच्च शिक्षा के लिए लाहौर चले गए। वहाँ से बी.ए. पास किया। लखनऊ से एल.एल.बी. की डिग्री ली। 1947 में टिहरी गढ़वाल लौटे। 1948 में जब रियासत में आन्दोलनकारी नेताओं को रियासत छोडने के लिए मजबूर किया जा रहा था, तो नेगी जी भूमिगत रहकर रियासत के जन-आन्दोलन में जुट गए। कीर्तिनगर में नागेन्द्र सकलानी और मोलू भरदारी के शहीद हो जाने के बाद नेगी जी ने आन्दोलन का नेतृत्व किया। गिरफ्तार कर लिए गए और 54 दिन जेल की सजा काटी। रियासत का भारत संघ में विलीनीकरण के पश्चात उ.प्र. की प्रोविजनल वि.सभा के लिए राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए गए। बाद के वर्षों में नेगी जी ने गहराई से अनुभव किया कि पृथक उत्तराखण्ड राज्य के बिना यहाँ का विकास नहीं हो सकता है। इसी भावना से 1977 में उन्होंने दिल्ली में उत्तराखण्ड राज्य परिषद का गठन किया। 1979 में बोट हाउस क्लब, दिल्ली में विशाल ऐतिहासिक रैली का आयोजन किया। प्रवासियों में उत्तराखण्ड राज्य के प्रति ललक जगाने में नेगी जी ने अपने ढंग से कार्य किया। जीवन के अन्तिम क्षणों तक आप उत्तराखण्ड राज्य प्राप्ति के लिए संघर्षरत रहे। आज पृथक उत्तराखण्ड राज्य अस्तित्व में आ गया है। काश! नेगी जी यह सब देख पाते व्यक्तिगत और राजनैतिक जीवन में नेगी जी सदैव चरित्रवान रहे।

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