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    शेर सिंह बिष्ट - शेरदा ‘अनपढ़’

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    sherda

    शेर सिंह बिष्ट - शेरदा ‘अनपढ़’

     जन्म:  अक्टूबर 13, 1933
     जन्म स्थान: माल गांव, अल्मोड़ा
     पिता:  श्री बचेसिंह बिष्ट
     माता:  श्रीमती लछिमा देवी
     व्यवसाय:  कुमाउँनी कवि
     पत्नीः  श्रीमती गौरी देवी
     मृत्‍यु  मई 20, 2012

    कुमाउनी कविता विकास में शेरदा 'अनपढ़' का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसका कारण ये भी है कि शेरदा 'अनपढ़' ने कुमाउनी कविताओं को सबसे पहले पहचान दिलाई। अनपढ़ होते हुए भी उनकी कविताओं में वो सब कुछ था जिससे एक कवि की कविधर्मिता पूरी होती है। उनकी कविताओं में पूरा पहाड़ समाया होता है, यहाँ का जीवन, यहाँ का लोक, पहाड़ का दर्द।


    प्रारंभिक जीवन


    शेरदा का जन्म 13 अक्टूबर 1933 अल्मोड़ा से कुछ दूरी पर स्थित माल गांव में हुआ। बचपन में ही इनके पिता श्री बचेसिहं जी का देहांत हो गया। पिता की बिमारी में घर और जमीन बेचना पड़ा जिससे इनकी परिवारिक आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ गई। पति के गुजर जाने के बाद इनकी माँ श्रीमती लछिमा देवी लोगों के खेतों में मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन पोषण किया। उस समय गांव घरों में लिखाई-पढ़ाई को इतना महत्व नही दिया जाता था। इस कारण शेरदा स्कूल पढ़ने नही गये। शेरदा ने कभी स्कूल का मुह तो नहीं देखा लेकिन हा एक शिक्षिका का मुह जरूर देखा जिनके घर उन्होंने पाँच साल की उम्र में पहली नौकरी की और उन्हीं शिक्षिका ने उन्‍हें प्राथमिक शिक्षा दी। कुछ साल इसी तरह काम करने के बाद शेरदा फौज में भर्ती हो गये।


    साहित्यिक जीवन


    फौज में उन्‍हें ड्राईवरी का काम मिला। जब ट्रान्सफर हो कर वो ग्वालियर गये तो वहाँ उन्हें टी.बी. हो गया, इलाज के लिए उन्हें पूना के मिलिट्री अस्पताल भर्ती करा गया। दो साल तक उनका वहाँ इलाज चला। यहीं उन्हें 1962 में चीन की लड़ाई में घायल हुए सिपाहियों से मिलने का मौका मिला। उन सिपाहियों की दशा देख कर शेरदा को अत्यंत दुख हुआ। तभी पहली बार उन्होंने अपने दर्द को कविता के रूप में उकेरा। बिमारी के कारण वो अल्मोड़ा लौट आये। वहां उन्हें कवि चारू चन्द्र पाण्डे और बृजेन्द्र लाल शाह का सानिध्य प्राप्त हुआ। फिर क्या था, शेरदा को एक नया आयाम मिलता रहा। लखनऊ, अल्मोड़ा, नजीबाबाद, रामपुर केन्द्रों से शेरदा के गीत और कविताओं के प्रसारण होने लगे।


    रचनायें


    1. ये कहानी है नेफा और लद्दाख की
    2. दीदी-बैणी
    3. मेरि लटि-पटि
    4. जाँठिक घुँङुर
    5. कठौती में गंगा
    6. हँसणै बहार
    7. हमार मै-बाप,
    8. फचैक
    9. शेरदा समग्र - 2008 में प्रकाशित ये किताब शेरदा की कुमाउँनी कविताओं का संग्रह है।
    10. शेरदा संचयन - यह किताब 2011 में प्रो० शेरसिंह बिष्ट जी के सम्पादन में प्रकाशित हुई।


    मृत्यु


    शेरदा 'अनपढ़' आज हमारे बीच नहीं है, पर उनका लिखा हुआ साहित्यिक खजाना उन्हें हमेशा अमर रखेगा। 20 मई 2012 को शेरदा अनन्त में विलीन हो गये।

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