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    प्रदीप टम्टा

    pradeep tamta rajya sabha member

    प्रदीप टम्टा

     जन्म:  जून 16, 1958
     जन्म स्थान:  पिथौरागढ़
     पिता:  श्री गुसाईं राम
     माता:  श्रीमती पार्वती देवी
     पत्नी:  श्रीमती रेणु टम्टा
     बच्चे: 2 पुत्रियाँर
     व्यवसाय:  राजनीतिज्ञ
     शिक्षा:  एल.एल.बी., एम.ए, बी.एड
     राजनीतिक दल:  कांग्रेस

    प्रदीप टम्टा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस यानी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और वकील है। वर्तमान में वह उत्तराखंड प्रदेश की अल्मोड़ा संसद क्षेत्र से राज्यसभा के सांसद है। इससे पहले वह अल्मोड़ा सीट से ही लोकसभा सांसद रह चुके है। वह मूल रूप से बागेश्वर ज़िले के निवासी जो साल 1997 तक अल्मोड़ा ज़िले का ही हिस्सा था।


    व्यक्तिगत जीवन


    श्री प्रदीप टम्टा का जन्म 16 जून 1958 को हुआ था। उनका जन्मस्थान पिथौरागढ़ जिला है। वह मूल रूप से लोब गाँव के है जो कि बागेश्वर ज़िले के अंतर्गत आता है। उनके पिता का नाम श्री गुसाईं राम था और माता का नाम श्रीमती पार्वती देवी था। उनके पिता एक पुलिस अफसर थे। उनके कुल 2 भाई और तीन बहने हैं। वह अपने भाइयों और बहनों में सबसे बड़े है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा टिहरी से की करी थी। उन्होंने अपनी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई चमोली ज़िले सी करी हुई है। वर्ष 1979 में उन्होंने अपनी स्नातक एवं वर्ष 1981 में उन्होंने परस्नातक डिग्री कोर्स की पढ़ाई कुमाऊँ यूनिवर्सिटी, नैनीताल से की थी। वर्ष 1991 उन्होंने अपना एलएलबी का कोर्स पूरा किया। उन्होंने एलएलबी, एम.ए और बी.एड की डिग्रियां हासिल करी हुई है।


    9 दिसंबर 1993 में 35 वर्ष की आयु में उन्होंने शादी करी थी। उनकी पत्नी का नाम श्रीमती रेणु टम्टा है। प्रदीप टम्टा और रेणू टम्टा की दो पुत्री है। नई दिल्ली के 111 के साउथ एवेन्यू में उनका आधिकारिक निवास स्थान है जबकि उनका गृह निवास स्थान लोब गाँव, बागेश्वर ज़िले में है।


    राजनैतिक जीवन


    उन्होंने बतौर सामाजिक कार्यकर्ता अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत करी थी। उन्होंने प्रदेश में चिपको आंदोलन के तहत पर्यावरण एवं वृक्ष संरक्षण के लिए सर्क्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने "नशा नहीं रोजगार दो" आंदोलन के तहत रोजगार के मुद्दे पर उत्तराखंड के युवाओं के हक़ की मांग को भी सड़क से संसद तक उठाने का काम किया है।


    अपने विधार्थी जीवन के दौरान उन्होंने ग्राम उत्थान संगठन और पर्वतीय युवा मोर्चा संगठन बनाकर भी पर्वत क्षेत्र के युवाओं के अग्रणी अगुवा के तौर पर सफलतापूर्वक काम किया था। प्रदीप टम्टा खुद को एक वामपंथी राजनेता के तौर पर परिभाषित करते है।


    1990 के दशक में पढ़ाई की समाप्ति के उपरान्त उन्होंने कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का निश्चय किया था। वह तत्कालीन राष्ट्रिया अध्यक्ष स्वर्गीय राजीव गाँधी की आधुनिकता एवं समाजवादी विचारधारा से काफी प्रभावित हुए। डेढ़ दशक तक संगठन सँभालने और उसे प्रदेश स्तर पर फैलाने एवं मज़बूत करने के उपरान्त उन्होंने साल 2002 में अल्मोड़ा ज़िले के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र से विधायक का चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीते।


    साल 2009 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा और भारतीय जनता पार्टी के अजय टम्टा को करीब 7 हज़ार वोटो के अंतर से हराया था। साल 2009 में ही वह विज्ञान एवं तकनीक समिति, भारत सरकार के सदस्य भी रहे। वह साल 2003 से 2004 तक उत्तराखंड उद्योग परिषद के वाईस-चेयरमैन पद पर भी कार्यत रहे।


    जब उत्तराखंड प्रदेश में एन डी तिवारी की सरकार थी तब पर्वतीय क्षेत्र के अनुसूचित जाती-जनजाति समाज की कन्याओं के लिए कन्या धन योजना जिसे अब गौरा देवी योजना के नाम से जाना जाता था, उसे लागू कराने में प्रदीप टम्टा ने अहम भूमिका निभाई है।


    वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वह अपनी सीट को बचाने में विफल रहे और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अजय टम्टा से हार गए जो अल्मोड़ा सीट से लोकसभा सांसद के तौर पर चुने गए। वर्ष 2016 के जुलाई महीने में हुए राज्यसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल करी और तब से वह अल्मोड़ा संसद क्षेत्र का राज्यसभा में प्रतिनिधत्व कर रहे है।


    उन्हें उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता है और एक समय वह सीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर भी देखे गए किन्तु अंत में आलाकमान ने हरीश रावत के नाम मोहर लगा दी। वह राज्यसभा की अनेक समितियों के वरिष्ठ सदस्य भी है और कांग्रेस की ऑल इंडिया वर्किंग कमिटी के मुख्य सदस्य भी है।


    प्रदीप टम्टा को उनके कुशल चुनावी रणनीतिक शैली और तेजतर्रार वक्तव्यों के लिए भी जाना जाता है। वह हर चुनाव में बूथ लेवल पर कार्यकर्ताओं के साथ काम करते है और प्रदेश इकाई एवं पार्टी आलाकमान के बीच सामंजस्य रखते है। बतौर राजयसभा सांसद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड और अमेरिका की यात्रा करी है। वह राज्य सभा में वन संरक्षण, उत्तराखंड के विकास, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज की स्थिति जैसे अहम एवं संवेदनशील मुद्दों पर अपनी बात संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में रख चुके है।


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