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    भुवन चंद्र खंडूरी

    bhuwanchandra 

     मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी

     जन्म:  अक्‍टूबर 1, 1934 
     जन्म स्थान: देहरादून 
     पिता:  श्री जय बल्लाब खंडूरी 
     माता:  श्रीमती दुर्गा देवी खंडूरी 
     पत्नी:  श्रीमती अरुणा खंडूरी 
     बच्चे:  2
     व्यवसाय:  राजनीतिज्ञ, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) 
     शिक्षा:  बी.ई. (सिविल) 
     राजनीतिक दल:  भारतीय जनता पार्टी 
     सम्मान:  अति विशष्ट सेवा मेडल (1982), मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड (2013)


    मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी, लोकप्रिय जन प्रतिनिधि, राजनेता और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं में से एक है। उन्होंने 2007-2009 और 2011-2012 से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की है। भारतीय सेना के अवकाश प्राप्त मेजर जनरल। अति विशष्ट सेवा मेडल से सम्मानित है।


    जीवनी


    खंडूरी का जन्म 1 अक्‍टूबर, 1934 में देहरादून में हुआ था। पैतृक निवास महर गाव मरगदना है। उनके पिता जय बल्लाब खंडूरी एक पत्रकार थे, और उनकी माता दुर्गा देवी खंडूरी एक सामाजिक कार्यकर्ता थी। इन्‍टर तक शिक्षा मेस्‍मोर कालेज, पौड़ी में ली। बी.एससी इलाहाबाद वि.वि. से और बी.ई. (सिविल) की डिग्री मिलेट्र इन्‍जीनियरिंग कालेज, पूणे(महाराष्‍ट्र) से ली। 1954 में बतौर लेफि्टनेन्‍ट सेना में प्रवेश किया। 1966 से 1968 तक सीनियर इन्‍सट्रक्‍टर (मेजर), मिलेट्री इन्‍जीनियरिंग कालेज, पुण्‍े में नियुक्‍त रहे। 1971-79 में जनरल अफसर (ले. कर्नल) रेजीमेंट, फील्‍ड एरिया और 1977-79 में जनरल अफसर, ग्रेड-1, सेना मुख्‍यालय रहे। 1978-81 की अविधि में कर्नल (डायरेक्‍टर, मैनेजमेन्‍ट स्‍टडीज सेना मुख्‍यालय) और 1983-86 में ब्रिगेडियर (चीफ इन्‍जीनियर, सिलीगुड़ी जोन) रहे। 1987-90 में मेजर जनरल (एडिशनल डायरेक्‍टर जनरल, इन्‍जीनियर-इन-चीफ सेना मुख्‍यालय) रहे। 39 वर्षां की सराहनीय सेवाओं के उपरान्‍त 1990 में अवकाश ग्रहण किया।


    व्यक्तिगत जीवन


    खंडूरी जी की शादी अरुणा खंडूरी से हुई है। उनके एक बेटा और एक बेटी है|


    राजनीतिक जीवन


    उन्होंने एक छात्र के रूप में आजादी के संघर्ष के दौरान देशभक्ति को दिखाया था और इस तरह, कम उम्र में भी एक उल्लेखनीय राजनीतिक चेतना का प्रदर्शन किया। अवकाश ग्रहण करने के उपरान्‍त जनरल खण्‍डूरी सक्रिय राजनीति में उतरे। खंडूरी पहली बार लोकसभा के लिए उत्तराखंड में गढ़वाल से 1991 और बाद के चुनावों में चुने गए थे। वह 2000 से 2003 तक अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार के साथ) थे। उन्हें 2003 में कैबिनेट रैंक दिया गया, और मई 2004 में एनडीए सरकार के कार्यकाल के अंत तक उन्होंने  इस पद को संभाला। फरवरी 2007 में हुए विधान सभा चुनावों में उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत का नेतृत्व किया और बाद में राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। 2012 में हुए विधान सभा चुनावों में उत्तराखंड में भाजपा को 70 में से 31 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। खंडूरी भी कोटद्वारा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हार गए। खंडूरी ने 7 मार्च 2012 को उत्तराखंड के राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। मई 2014 के लोक सभा चुनाव में खंडूरी ने गढ़वाल (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से 1,84,526 मतों के अंतर से चुनाव जीता।

    वर्तमान में वह 16 वीं लोकसभा में संसद सदस्य हैं। वह लोक सभा में उत्तराखंड के गढ़वाल संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य हैं। माजूदा भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य और सड़क एवं परिवाहन मंत्रालय सलाहकार समिति के सदस्य भी है।


    अन्य ख़ास बातें


    - खंडुरी ने 1954 से 1990 तक भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ़ इंजीनियरस में काम किया।

    - 1982 में उन्हें भारतीय सेना में अपने असाधारण योगदान के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) सम्मान प्राप्त हुआ। वह भारतीय सेना के मेजर जनरल सेवानिवृत्त हुए।

    - वह उत्तरांचल प्रदेश संघ समिति के अध्यक्ष भी रहे और उत्तराखंड के नए राज्य के गठन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    - खंडूरी चंद्र बल्लाभ ट्रस्ट की गतिविधियों की देखरेख करते है जो गढ़वाल में एक शैक्षिक ट्रस्ट है और 1917 में उनके दादाजी द्वारा ही शुरू किया गया था।

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