Folk Songs

    याद है वो नन्ही नन्ही गौरेया

    Read This Article in Hindi/ English/ Kumauni/ Garwali

    याद है, वो नन्ही नन्ही गौरेया?
    कैसे सुबह सुबह
    चीं चीं करके आंगन में उतर आती थी।
    ईजा जब डालती चावल के दाने
    आवाज लगाकर अपने साथी संगीयों को भी
    बुला लाती थी।
    दिन भर बस आस पास ही उड़ती फुदकती
    उछलती रहती थी।
    छत के नीचे लगी बल्लियों के बीच
    घर हुआ करता था,
    बच्चे पुकारते तो मुंह में भरकर दाने
    उड़ जाती उनके पास खिलाने
    घर के पीछे नींबू का एक पेड़ हुआ करता था
    वहां बैठे अक्सर जाने क्या बतियाते रहती
    दोस्तों के साथ
    गौरेया जो जीवन का हिस्सा हुआ करती थी।

    कुछ सालों से मगर खफा सी है शहर से
    गुस्सा होकर चली गई है कहीं
    अब नहीं दिखती
    आमा कहती है गांव में लेकिन
    आती है रोज उसी तरह
    उछलते फुदकते हुए मिलने

    वो नन्ही नन्ही गौरेया।



    - वैभव जोशी

    Related Article

    Vahaan Himaalay Men

    Shiv Mahasoos Hue The Mujhe

    Main Bhee Kabhee Ghar Thaa

    Kuchh Gaanv Saa Baakee Hai

    Ke Ni Hun

    Jay Golu Devata

    Aaj har pahaad mujhako

    Devadaar ab utane kahaan

    Ek aur gauraa

    Leave A Comment ?

    Popular Articles

    घुघुती बासुती - Ghughuti Basuti

    हमरो कुमाऊँ - Humro Kumaon

    984

    बेडू पाको बारमासा - Bedu Pako Baramasa

    901

    भूली निजान आपुण देश - Bhooli Nijan Apun Desh

    894

    अटकन बटकन दही - Atkan Batkan Dahi

    858

    उड़ कूची मुड़ कुचि - Ud Koochi Mudh Kuchi

    835

    भली तेरी जन्म भूमि - Bhali Teri Janmbhoomi

    663

    Aa Ha Re Sabha

    623

    Keisha Ho School Humara

    612

    Sherda Bhal Cha

    592

    Also Know

    Keishe Kah Doon In Saalon Men

    465

    Dhany Yo Graam Badaau

    72

    Jamunaa Taṭ Raam Khelen

    235

    Kuchh Gaanv Saa Baakee Hai

    87

    Shiv Ke Man Maahi

    216

    Jay Golu Devata

    82

    Kaile Baandhee Cheer

    182

    He merii aankhyun kaa ratan

    469

    Holee Aaii Re Kanhaa_ii Rng

    222

    भूली निजान आपुण देश - Bhooli Nijan Apun Desh

    894