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    नथ - स्यैंणिक् सिंगार बैगैकि शान

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    नथ - स्यैंणिक् सिंगार बैगैकि शान

    Nath

    कुमाउँनी नथ


    कान में कनफूला ख्वारै की बिन्दुली,
    के भली छाजें छ नाकै की नथुली


    नथैलि छाजैं नाक, नाकैलि छाजं मुख, मुखै सून्दरताल छाजें स्यैणि और स्यैणिक् शोभालि छाजनि घर और घरवाल्।


    सिंगार बिना स्यैणि नि छाजेंनि, गहण बिना सिंगार अपुर और नथ बिना गहण अपुर। सबै गहण एक तरफ, नाकैकि नथ एक तरफ। नथ में सुहाग छु, सम्मान छु, समृद्धि छु और छु मुष्किल बखतौक सहार। तबैत एक स्यैणि कूनेर भैः


    नथ मेरि पचलड़ मथें के मांगु गंगनाथज्यू थें.....


    संसारक् सबै देषन में स्यैणी भौत किस्मैलि आपण सिंगार करनीं। सिंगारा लिजी मुख्य साधन जेवर हुनी। दुनी में भारतैकि स्यैणी सबसे जादे आभूषण प्रेमी मानी जानीं। याँ खुटाक् आंगुलन बटी ख्वाराक् बालन तक पुरे आंङा लिजि किसम किसमाक् जेवर बणनी और पैरी जानीं। नाक में पैरणा लिजी नथ, नथुलि, नथनियाँ, बुल्ला, बुलांक, बेसर और फुलि बणाई जानी। नथ भारत में सबै जाग पैरी जांछि पर गढ़वाल और कुमाऊँकि नथ सब है न्यारि छु। और जागन में नानि-नानि बालि जासि नथ पैरी जांछि तथा नथ सुहागैकि अनिवार्य चिन्ह मानी जानि; जबकि गढ़वाल और कुमाऊँकि नथ देखण में ले ठुलि छु और मान महत्व में लेक।


    सबै धातुन में श्रेष्ठ सुन, सुनाँक् मुख्य भै नथ। नथ में स्यैणिकि की शोभा और बैगैकि सम्पन्नता तथा कुल-खानदानैकि इज्जत हुँछि। ब्याक बखत नथ सबनहै जरूरी है जांछि। सिन्दूर और काल चर्याक न्यात नथ लै सौभाग्यक मुख्य चिन्ह छु। क्वे-क्वे मैत बटि ले नथ दिनै छन। ब्याक् कर्म काण्ड घाघर, पिछौड़ और नथ पैरि बेर पुर हुँछ। कबै क्वे गरीब मैंस नई नथ नि बणै सकना, जब त् ऊँ परिवार या रिस्तदारि में है कैकी नथ मांगि बेर ढपल्ट लिजानीं, तबले बिगर नथै ब्या नि करन। गरीब समाज में एकै नथैलि भौत जणीनाक् ब्या है जानी।


    सुनार लै नथ बणूण में बड़ मन-मेहनत लगूँनी। हथैलि कसिणि कारीगरी करीं एक नथ कें तैयार करण में कबै पाँच-छै महैण लै लागि जानीं। बौं नाक में पैरणी यो नाथक् बौं तरफ सबसे मलि एक चन्दक बणि रूँछ; जैक आठ फूलन में कुन्दन भरि राखनी, वीक बाद लाल, हरी और सफेद मोती तथा उनार बीच में जालिदार काम करीं सुनाक् दाण गछयैं बेर नथैकि बौं तरफैंकि गोलाइ भरी रूँछि। ग्वार फनार पहाड़ि स्यैणीनाक बौं गाल में यो सजावट देखणैं लायक हुंछि। कुन्दन करी चन्दक सैंकणों हजारों साल तक खराब नि हुन। यैक महत्व जादे छु। लेकिन यैके बणूण में मेहनत और बखत जादे लांगछ ये कारण आजकल चन्दक में कांचाक टुकुड़ भरण बैठि गई। चन्दक और मोती नाक बीच में एक सिणुक लै धरी जांछ। काम करण में नथ फसै दिनी। सुहागिलि स्यैणिक् नाक खालि नि रूण चैनेर भै। नथक संन्तुलन बराबर राखणीलिजि बौं तरफ एक डोरि ले लगाई जांछ। सुन मोती या लाल धागैकि ये डोरिक दुसरा टुक में एक हुक जैसि आंटि बणि रूंछि। वी कें कानान मलि ख्वाराक बालन में फंसै दिनी। भौत लोग नथाक् तलि बटी एक लटकन लै लगूनी लटकन में चन्दक और नान-नान घुंङुर लै हुनीं। गढ़वालैकि नथन में लटकन नि हुन, लेकिन उनरि कारीगरी भौत सुन्दर हुंछि। कला कारीगरी में सबसे सुन्दर नथ टिहरी गढ़वाल में बणनीं।


    LadywithNath

    महिला कुमाउँनी नथ पहने हुए


    पहाड़ी नथ और सब जागनैकि नथ है ठुलि हुंछि। यैके आकार और वजन में लै भौत प्रकार हुनि। जादेतर स्यैणी ढाइ-तीन त्वालैकि नथ पैरनीं। वी है कम एक-ड़ेड त्वाल सुनै नथ हुनि। शेठ-सौकारना घरन में दस बार त्वलैकि नथ ले हुनि। उन उनान खानदानैकि निशानि हुँछि। खानदानी नथ सास आपणि ब्वारि कें दिंछि। अछ्यालन फैशन और मंहगाई कारण नानि नथ पैराणाँक रिवाज हैगो। आजकलैकि एक पौण या आदु त्वालैकि नथ पुर्ाणि नथना सामाणि बालि जसि देखीनीं। ठुलि नथन में एक-डेढ़ त्वालैकि लटकनै हुँछ।


    नानि हो चाहे ठुलि; नथ में स्यैणीनाक प्राण बसनीं। नथ दगै उनर सुहाग, सिंगार, सम्मान सबै जुड़ी भै। नानछना तीन साली बटी सात सालैकि उमराकिं नानि-नानि चेलीनाक नाक-कान छेड़ि बेर उनार मन में नथाक बारि में भाल-भाल स्वीण बोई जानीं। ऊन स्वीणन में आपणि सुन्दर कल्पना पाणि सिंचन-सिंचन जब ऊन ज्वान हुनि तब तक उनार स्वीण ले ज्वान हैं जानी। उनरि आम, इज, काखि, ज्याड़जा और सबै सयाण स्यैणी उनन कें बताते रूँनी कि ठुलि होली, तेरी रंगिलि-चंगिलि बर्यात आलि। त्यर बर तेहुणि घाघर-पिछाँड़ और नथ ल्याल। तू भाल-भाल लत-कपड़ और जेवर पैरिबेर ब्योलि बणली।


    नाक छेदण बखत नाक में पीड़ हुंछि। नान चेनी नाक छेड़णा डरैलि वलि-पली भाजनी; तब सयांणि स्यैणी उनन कें पकड़ि बेर उनार नाक छेड़नीं। उनार खाप गुड़, मिसिर, लड्डू हालि बेर उननकें बोत्यूंनी। भौत बखत नाक कान पाक लें जानीं। छेद बुजी जानीं। तब दुबारा तिबारा लै नाक छेड़ी जांछ। यसिक पीड़ सहारि-सहारि बेर चेली आपण नाक कें नथ पैरणालिजि तैयार करन-करनै ठुलि हुनी। उनार मनस्वपन में नथ, ब्या, वर और नयी जीवनैकि प्रतीक बणि जांछि। नथ ब्याक दिन बे पैरीनेर भै। वी है पैंली शौकिन चे्ली फुलि या बालि पैरि सकनी। और विधवा हुण पर नाक खालि रूंछ। कति-कति यस लै मानी जांछ कि जैकि नथ ब्या ठरीण है पैली बणि जाछि वीके ब्या में अड़चन ऊँनी। तब वी नथ कें भाँचि दियोत् ब्या है जाँछ।


    नथ सुहागिलि स्यैणिक पछ्याण भै और बैगैकि शान, जो जस सौकार, वी घराक स्यैणिनैकि उसी ठुलि नथ। ब्या, ब्रतपन्द, नामकरण, छठी, पासणि, जनम्बार और ब्रत-पुजपातिक् बखत स्यौंणी पुर सिंगार करनीं और नथ पैर बेर सिंगार पुर हुनेर भै। द्यप्ता थान जाण में और मैत-सरास जाण बखत लै नथ जरूर पैरी जांछी। जैथें नथ नि भै ऊ म्यालै नि जानेर भै। तबैत एक भिन जब आपणि सालि कें म्याल हिटणालिजि मनूँछ तब सालि कुँछिः


    म्यर नाक में नथूली न्हैति कसिकै जानूँ दोरिहाटा।
    तब भिन कूँछ-
    वाँ सुनार, वैं बणूला दोरिहाटा
    हिट साई कौतीक जाँनू दोरिहाटा।


    पुराण जमानैकि स्यैणी हर बखत नथ पैति राखंछि। गाड़-भिड़न काम करण बखत लै नाकैकि नथ झलमलाते रूँछी। ऊ बखत में चोरि-लूट पाटै ले डर निछि। बोटन में जाण बखत या रात गालून पैरि लिहंछि।


    शोभा-सम्पन्नताकि सूचक यो नथ मान-संमानैकि और इज्जतैकि प्रतीक ले मानी जाँछी। जसी नाक काटीणक मतलब बदनामी मानी जाँछ। नथ हराण में अपशकुन मानी जाँछ। सुहागिलि स्यैणिक् पास नथ और सुनौक एक किस्स समाज में आर्थिक असमान्ताक् सूचक लै छु, कि-


    'जाँ सुन छु वाँ नाक न्है'
    'जाँ नाक छु वाँ सुन न्है'


    अर्थात जाँ सुन छु, मतलब कि समृद्धि छु। आफते बखत में यो नथ जमा - पूजी बणि बेर परवारौक गुजार चलूण में मदद करें। यो सबनहैं ठुल स्त्री धन छु। निर्धन स्यैणी एक नाथक सुनैलि ठुल-ठुल काज पुर करि दिनि। जैक पास गरीबी बखत एक नथै लै नि भै, ऊ स्यैणि तवाई बेर कुंछि:-


    रांग हराण भांग हराण
    मैं राण ही नथक लाकड़ हराण


    नथ हराण दुर्भाग्यैकि निशानी भैं। हमार समाज में स्यैणिक सबै सुख-अधिकार सुहाग दगै जोड़ी रूँनी, सुहाग नि भै त के निभै और सुहागैकि प्रतीक भै यो नथ। तबै कूनी नथ निभै त के नि भै।


    लेखक -डॉ० दिवा भट्ट, उपाचार्य, हिंदी विभाग
    कु० वि० वि० परिसर, अल्मोड़ा
    संदर्भ - स्मारिका, कुमाऊँ महोत्सव - 2000

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