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    जॉर्ज विलियम ट्रेल - कुमाऊँ कमिश्नर

    William Trail Kumaon Commissioner

    जार्ज विलियम ट्रेल (1775-1845): जन्म: ब्रूसेल्स के निकट वेल्ले नामक स्थान- फ्रान्स में। गढ़वाल-कुमाऊँ का दूसरा अंग्रेज कमिश्नर और कुमाऊं के पहले ब्रिटिश उपायुक्त। अग्रसोची और अनुभवी प्रशासक। गढ़वाल और कुमाऊँ पर अंग्रेजी राज की प्रशासनिक जड़ों को रोपने वाला इतिहास प्रसिद्ध अधिकारी।


    कुमाऊँ गढ़वाल में ब्रिटिश राज के 132 वर्षों के प्रशासन में जार्ज विलियम ट्रेल का नाम यहां पर अंग्रेजी राज के संस्थापक के रूप में इतिहास में अंकित है। आज उत्तराखण्ड में पट्टी, परगना, पटवारी, कानूनगो, थाना, चौकी, सयाणा, मालगुजार, भूमि बन्दोबस्त, अभिलेख, जेल, डाक, अस्पताल, जिलों और जंगलों का सीमांकन आदि, प्रशासन के नाम पर जो भी व्यवस्था है- इन सभी का जनक ट्रेल है। William Trail Kumaon Commissioner


    भारत में अपने 25 वर्षों के सेवाकाल में ट्रेल ने 20 वर्ष कुमाऊँ में बिताए। हेलेवरी में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ट्रेल ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी में पेशकार की नौकरी कर ली। कुछ दिनों फर्रुखाबाद में मजिस्ट्रेट का सहायक रहने के बाद 13 अप्रैल, 1816 को उसकी नियुक्ति कमिश्नर कुमाऊँ के पद पर हुई। 1 दिसम्बर, 1835 को रिटायर होने पूर्व उसने 3 महीने का अवकाश लिया और लन्दन चला गया। वहां भारतीय मित्रों के साथ शेष जीवन व्यतीत किया। एक दिन अचानक ओरियन्टल क्लब में सन् 1874 में उसका निधन हो गया। विलियम ट्रेल उन चन्द अंग्रेज अधिकारियों में से था- जिसने अपने प्रशासनिक सेवाकाल में कभी अवकाश नहीं लिया। यहां रहते हुए उसने अविवाहित जीवन बिताया यद्यपि हवालबाग (अल्मोड़ा) की एक सुन्दर अविवाहित हरिजन महिला से उसे एक लड़का और एक लड़की प्राप्त हुई, जो बाद में मर गए (आर.एस. टोलिया, आई.ए.एस. लिखित पुस्तक 'ब्रिटिश कुमाऊँ-गढ़वाल: 1815-1835')।


    विलियम ट्रेल की प्रशासनिक देन


    27 अप्रैल 1815 को अल्मोड़ा अंग्रेजों के हाथ आ गया था और इस प्रकार कुमाऊँ से 25 वर्ष पुराने गोरखा शासन की इतिश्री हुई। एडवर्ड गार्डनर को तत्काल गवर्नर-जनरल का एजेन्ट और "कमिश्नर फार द अफेयर्स आफ कुमाऊं" नियुक्त किया गया। उसका वेतन रु. 1500 निश्चित किया गया। प्रशासनिक सुविधा के लिए गढ़वाल-कुमाऊँ को एक इकाई के रूप में रखा गया, जिसे "कुमाऊँ" नाम दिया गया। सर्वप्रथम 21 जुलाई, 1815 को नेपाल और रियासत टेहरी से लगी सीमा का निर्धारण किया गया। गार्डनर ने शीघ्र ही कुमाऊँ में 7 तहसीलें गठित की- कोट अल्मोड़ा, काली कुमाऊँ, पाली, कोटा, फल्दाकोट, सौर और श्रीनगर।


    इसी समय राजस्व मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए गार्डनर ने एक सहायक की मांग की। इसी क्रम में 22 अगस्त, 1815 को जार्ज विलियम ट्रेल की नियुक्ति सहायक कमिश्नर, गढ़वाल के पद पर कर दी गई। गढ़वाल क्षेत्र में ट्रेल ने भूमि बन्दोबस्त प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया। अप्रैल, 1816 में एडवर्ड गार्डनर को नेपाल में पोलेटिकल एजेन्ट नियुक्त किया गया और ट्रेल को कमिश्नर कुमाऊँ। गोरखा काल में जनता पर अनेक टैक्स लगाए गए थे, जिससे जनता बेहद त्रस्त थी। कृषि कार्य चौपट हो गया था। अधिकांश लोगों ने खेती करना बन्द कर दिया था। ट्रेल ने अवैध टैक्सों को तुरन्त बंद करवा दिया। गाँव में सयानों को नियुक्त कर उन्हें मालगुजारी वसूलने का काम सौंपा। इसका परिणाम यह हुआ कि गोरखा शासन की साढ़े इक्यावन हजार मालगुजारी बढ़ कर सवा लाख हो गई। 1819 में उसने पहली बार बारामण्डल में 9 पटवारियों की नियुक्ति की। अपने कार्यकाल में ट्रेल ने इधर सात बार भूमि बंदोबस्त करवाए। 1823 (संवत् 1880) का बंदोबस्त सबसे प्रमुख माना जाता है। इसे आज तक अस्सी साला बंदोबस्त के नाम से जाना जाता है। इस बंदोबस्त के द्वारा गढ़वाल-कुमाऊँ में 26 परगने स्थापित किये गए। ये परगने हैं- कुमाऊँ में- पाली, बारामण्डल, चौगर्खा, फल्दाकोट, धनियाकोट, दानपुर, गंगोली, कोटा छखाता, कटोली, जोहार, दारमा, काली कुमाऊँ, ध्यानीरी, सोर, सीरा (अस्कोट) तथा गढ़वाल में- बारहस्यूँ, देवलगढ़, चाँदकोट, नागपुर, गंगा सलाण, पैनखण्डा, चाँदपुर, बधाण, तल्ला सलाण, मल्ला सलाण और दशौली। 1821 में पाँच और 1825 में सोलह और पटवारी नियुक्त किए। इस व्यवस्था से मालगुजारी में काफी इजाफा हुआ। 1815-16 की सवा लाख मालगुजारी 1834 में एक लाख पचानब्बे हजार तक पहुंच गई थी। Kumaon Commissioner George William Traill


    पटवारियों और कानूनगो की नियुक्ति उच्च कुल और राजभक्ति को देखकर ही की जाती थी। कुमाऊँ में अधिकतर जोशी व चौधरी जाति के लोगों तथा गढ़वाल में खण्डूरी व एक-दो अन्य जाति के लोगों को ही इन पदों पर नियुक्त किया जाता था। 1863 तक गढ़वाल-कुमाऊँ में 63 पटवारी नियुक्त हो चुके थे। आरम्भ में अल्मोड़ा, कोटा, काठकिनाव, छखाता व तिमला में पुलिस थाने खोले गए। श्रीनगर व कोटद्वार में उप थाना स्थापित किये गए। 1817 में अल्मोड़ा में और 1827 में पौड़ी में जेलों का निर्माण हुआ। अल्मोड़ा में तोपखाना, नेटिव इन्फैन्ट्री, हिल पायनियर, इंजीनियरिंग कोर आदि यूनिटें स्थापित हुई। 1826 में ट्रेल ने वनों को राज्य की सम्पत्ति घोषित करते हुए लकड़ी आदि लाने पर टैक्स लगा दिया। 1824 में तराई के साल के जंगलों को संरक्षित (रिजर्व) घोषित कर दिया। 1833 में अल्मोड़ा में पहले डाक्टर की नियुक्ति हुई। 1828 में कुमाऊँ-गढ़वाल में महामारी से करीब तेरह हजार लोगों की मृत्यु हुई थी। कुमाऊँ के दक्षिण में रोहेलखण्ड से जुड़ी सीमा का निर्धारण भी ट्रेल ने ही किया था। विलियम ट्रेल बड़ा साहसी अंग्रेज था। 1830 में उसने नन्दादेवी और नन्दाकोट उच्च मध्य शिखरों के मध्य एक दुरूह गिरिपथ को पार करने में सफलता प्राप्त की। तब से इस गिरिपथ का नाम 'ट्रेल्स पास' पड़ गया। Kumaon Commissioner Trail

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