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    गंगा दशहरा - द्वार-पत्र

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    गंगा दशहरा एक राष्ट्रव्यापी पर्व हैं। यह ज्येष्ट सुदी 10 को मनाया जाता है कुमाऊँ में ब्राह्मण लोग एक वर्गाकार सफेद कागज में विभिन्न रंगों का वृत्त बनाकर उसके बाहर एक श्लोक लिखकर या छपवाकर अपने-अपने यजमानों के घर जाकर दरवाजे के ऊपर चिपका जाते हैं। इस अवसर पर ब्राह्मणों को चावल, अन्न और दक्षिणा भी दी जाती है। इस दशहरा द्वार-पत्र लगाने के पीछे प्राचीन समय से यह किवन्दती चली आ रही है कि इससे भवन पर वज्रपात, बिजली आदि प्राकृतिक प्रकोपों का विनाशकारी प्रभाव नहीं पड़ता है।
    लगभग 85 से 90 वर्ष पहले गंगादशहरा (द्वार पत्र) बनाने की विधि इस प्रकार थी एक साफ सुथरे पत्थर (स्लेट) में चित्र (उल्टी आकृति) बनाकर मन्त्र लिख कर मशीन में लगाया जाता था। फिर पत्थर के चित्र में खाली जगह पर पानी लगाया जाता था। इसके बाद चित्र पर काली स्याही लगाई जाती थी। इसके बाद पत्थर की स्लेट पर कागज रखा जाता था। ऊपर भारी चीज से दबाव दिया जाता था। जिससे पत्थर में बने चित्र कागज में छप जाते थे। सफेद कागज में चित्र छप कर उसमें रंग भरे जाते थे।

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